नॉर्वे चेस 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार वापसी करते हुए सातवें राउंड में दमदार प्रदर्शन किया। एक दिन पहले छठे राउंड में सभी भारतीय खिलाड़ियों को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन अगले ही दिन भारत के युवा ग्रैंडमास्टरों ने जोरदार वापसी की। पुरुष वर्ग में आर. प्रज्ञानानंदा और विश्व चैंपियन डी. गुकेश ने अपने-अपने मुकाबले जीत लिए, जबकि महिला वर्ग में दिव्या देशमुख ने अनुभवी भारतीय ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी को हराकर खिताबी दौड़ में अपनी दावेदारी मजबूत कर ली।
प्रज्ञानानंदा की शानदार जीत
युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने सातवें राउंड में संयमित और आक्रामक खेल का बेहतरीन मिश्रण दिखाया। शुरुआती चालों से ही उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और मिडिल गेम में मिली बढ़त को अंत तक कायम रखा। इस जीत के साथ उन्होंने टूर्नामेंट की अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। प्रज्ञानानंदा इस टूर्नामेंट में लगातार शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देते नजर आ रहे हैं और उनका प्रदर्शन भारतीय शतरंज प्रशंसकों के लिए उत्साहजनक रहा है।
गुकेश विश्व चैंपियन
वर्तमान विश्व चैंपियन डी. गुकेश ने भी सातवें राउंड में शानदार जीत दर्ज की। छठे राउंड की हार के बाद गुकेश पर वापसी का दबाव था, लेकिन उन्होंने अनुभव और धैर्य का परिचय देते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। गुकेश ने एंडगेम में बेहतरीन तकनीक दिखाई और अपने प्रतिद्वंद्वी की छोटी-सी गलती का पूरा फायदा उठाया। उनकी इस जीत ने टूर्नामेंट में रोमांच और बढ़ा दिया है।
दिव्या देशमुख
महिला वर्ग में दिन का सबसे बड़ा आकर्षण दिव्या देशमुख की जीत रही। उन्होंने भारत की टॉप महिला खिलाड़ियों में शामिल कोनेरू हम्पी को हराकर बड़ा उलटफेर किया। दिव्या ने पूरे मुकाबले में आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए हम्पी को ज्यादा मौके नहीं दिए। यह जीत उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे वह खिताब की दौड़ में मजबूती से बनी हुई हैं। दिव्या देशमुख का प्रदर्शन इस टूर्नामेंट में लगातार प्रभावशाली रहा है। युवा भारतीय खिलाड़ी ने कई मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ बेहतरीन खेल दिखाया है। हम्पी पर मिली जीत ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाया है। यदि दिव्या इसी लय को बरकरार रखती हैं तो वह नॉर्वे चेस के महिला वर्ग में खिताब की प्रबल दावेदार बन सकती हैं।
छठे राउंड के बाद जोरदार वापसी
भारतीय खिलाड़ियों के लिए छठा राउंड निराशाजनक रहा था, जब सभी भारतीय खिलाड़ियों को हार झेलनी पड़ी थी। इससे भारतीय खेमे में कुछ चिंता जरूर बढ़ी थी, लेकिन सातवें राउंड में खिलाड़ियों ने शानदार जुझारूपन दिखाया। प्रज्ञानानंदा, गुकेश और दिव्या की जीत ने यह साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी किसी भी चुनौती से उबरने की क्षमता रखते हैं।
भारतीय शतरंज का स्वर्णिम दौर
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शतरंज ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। विश्व चैंपियन गुकेश, प्रज्ञानानंदा, अर्जुन एरिगैसी, विदित गुजराती और दिव्या देशमुख जैसे युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। नॉर्वे चेस जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि विश्व शतरंज में भारत की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है।
खिताबी मुकाबला
टूर्नामेंट के अंतिम चरण की ओर बढ़ते हुए अंक तालिका में मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। हर जीत और हार का असर सीधे खिताबी दौड़ पर पड़ रहा है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों की नजर अब अगले राउंड में भी जीत का सिलसिला जारी रखने पर होगी।
