Nursery Startup:खेती-किसानी में बढ़ती लागत के बीच किसान अब आमदनी के अतिरिक्त साधन तलाश रहे हैं। ऐसे में पौधों की नर्सरी का कारोबार कम निवेश में शुरू किया जाने वाला एक विकल्प बन सकता है। इसमें सब्जियों, फलों और सजावटी पौधों की पौध तैयार कर स्थानीय बाजार, किसानों, बागवानों और घरों में पौधे लगाने वाले लोगों को बेचा जा सकता है।
नर्सरी कारोबार की खास बात यह है कि इसे बड़े स्तर पर शुरू करने के बजाय किसान अपनी उपलब्ध जमीन और बजट के अनुसार छोटे स्तर से शुरू कर सकते हैं। मांग बढ़ने के साथ पौधों की संख्या और किस्मों को भी बढ़ाया जा सकता है।
सब्जियों की पौध से हो सकती है शुरुआत
किसान नर्सरी में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी और दूसरी मौसमी सब्जियों की पौध तैयार कर सकते हैं। खेत में सीधे बीज बोने की तुलना में कई किसान तैयार पौध खरीदना पसंद करते हैं, जिससे नर्सरी संचालकों के लिए बाजार तैयार हो सकता है। सीजन के अनुसार पौध तैयार करने से बिक्री के अवसर बढ़ सकते हैं। उदाहरण के लिए सब्जियों की अलग-अलग फसलों के मौसम में संबंधित पौध की मांग बढ़ सकती है।
फलों के पौधों की भी रहती है मांग
सब्जियों के अलावा किसान फलदार पौधों की नर्सरी भी तैयार कर सकते हैं। अमरूद, नींबू, पपीता, आम और दूसरे स्थानीय रूप से मांग वाले पौधों को बाजार की जरूरत के अनुसार शामिल किया जा सकता है। हालांकि फलदार पौधों में गुणवत्ता और सही किस्म का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। शहरी और ग्रामीण इलाकों में घर, कार्यालय, दुकान तथा अन्य स्थानों को सजाने के लिए सजावटी पौधों की मांग रहती है। किसान नर्सरी में ऐसे पौधे भी तैयार कर सकते हैं। इससे केवल खेती करने वाले ग्राहकों पर निर्भरता कम की जा सकती है।शुरुआत से पहले इन बातों का रखें ध्यान
नर्सरी शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार में यह पता करना जरूरी है कि आसपास के किसान और ग्राहक किन पौधों को ज्यादा खरीदते हैं। पानी की उपलब्धता, पौधों के लिए उपयुक्त स्थान, बीज और रोपण सामग्री की गुणवत्ता तथा पौधों की देखभाल पर भी ध्यान देना होगा। इसके अलावा पौधों की बिक्री के लिए केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रहने के बजाय सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। स्थानीय किसानों और बागवानों से सीधे संपर्क बनाकर नियमित ग्राहक तैयार किए जा सकते हैं।
कम जगह से शुरू कर सकते हैं कारोबार
नर्सरी कारोबार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे किसान अपनी क्षमता के अनुसार छोटे स्तर से शुरू कर सकते हैं। शुरुआत में सीमित किस्मों की पौध तैयार कर बाजार में बिक्री की जा सकती है। मांग और अनुभव बढ़ने के साथ कारोबार का विस्तार किया जा सकता है। हालांकि किसी भी व्यवसाय में मुनाफा निश्चित नहीं होता। पौधों की बिक्री, मौसम, उत्पादन लागत, स्थानीय मांग और बाजार कीमत जैसे कई कारक कमाई को प्रभावित करते हैं।

