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प्राचीन मंदिरों के अनमोल पुरावशेष मिले
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पुराना इतिहास : बम्हनी में मिले सिरपुर के समकालीन दो भव्य मंदिरों के अवशेष, छिपे हो सकते हैं प्राचीन शहर के राज़!

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बम्हनी गांव (पचदेवरी क्षेत्र) में खेत की खुदाई के दौरान कथित रूप से 8वीं–11वीं शताब्दी के प्राचीन मंदिरों से जुड़े अवशेष मिले हैं, जिनमें आमलक, नक्काशीदार स्तंभ, ईंटें और द्वारपाल मूर्तियों के टुकड़े शामिल बताए गए हैं। पुरातत्व विभाग की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया है और इसे वैज्ञानिक खुदाई के लिए उपयुक्त माना गया है।

कीर्तिमान न्यूज
14 Jun 2026, 08:02 AM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरती एक बार फिर देश-दुनिया के सामने अपना गौरवशाली इतिहास बयां कर रही है। महासमुंद जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर स्थित, ऐतिहासिक और पंचकोसी यात्रा के प्रमुख पड़ाव बम्हनी गांव में जमीन के भीतर इतिहास का एक बहुत बड़ा रहस्य दफन है।

हाल ही में बम्हनी गांव के पचदेवरी इलाके में किसान गीतन के खेत के पास एक मिट्टी के टीले की खुदाई के दौरान अचानक 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच के प्राचीन मंदिरों के अनमोल पुरावशेष, मूर्तियां, आमलक और द्वारपाल की खंडित कलाकृतियां बाहर आ गईं। इस चौंकाने वाली खोज के बाद से पूरे इलाके में कौतूहल और उत्साह का माहौल है।

संस्कृति मंत्री का वीडियो कॉल और पुरातत्व विभाग का 'हाईलेवल' एक्शन

इस बड़ी खोज की खबर मिलते ही शासन-प्रशासन तुरंत एक्शन में आ गया। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और विभाग के डायरेक्टर के सख्त निर्देश पर शनिवार दोपहर 12 बजे पुरातत्व विभाग की एक हाईलेवल एक्सपर्ट टीम सीधे बम्हनी गांव पहुंची।

  • मौके पर पहुंचे विशेषज्ञ: जांच टीम का नेतृत्व पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर प्रतापराव परिख और वरिष्ठ पुरातत्वविद प्रभात कुमार सिंह ने किया। उन्होंने करीब 5 फीट ऊंचे टीले और वहां बिखरे पड़े स्थापत्य खंडों का गहन वैज्ञानिक निरीक्षण किया।

  • मंत्री की ग्रामीणों से सीधी बात: निरीक्षण के दौरान संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल खुद वीडियो कॉल के जरिए इस टीम और ग्रामीणों से जुड़े। उन्होंने लाइव वीडियो के माध्यम से इन ऐतिहासिक अवशेषों को देखा और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि इस पूरी धरोहर को पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित किया जाएगा।

सिरपुर सभ्यता से जुड़ा है कनेक्शन!

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:

खोजे गए पुरावशेषऐतिहासिक महत्व और काल (Period)
दो विशाल 'आमलक' (मंदिर के शिखर का ऊपरी हिस्सा)खसरा नंबर 141 (पचदेवरी) में मिले इन आमलकों से साबित होता है कि यहां कभी दो भव्य और विशाल प्राचीन मंदिर स्थापित थे।
प्राचीन लाल ईंटें व नक्काशीदार स्तंभवरिष्ठ पुरातत्वविद प्रभात कुमार सिंह के अनुसार, ये ईंटें और स्तंभ विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगरी 'सिरपुर' के समकालीन (8वीं से 11वीं शताब्दी) हैं।
द्वारपाल व खंडित मूर्तियांमंदिर के प्रवेश द्वार पर रहने वाले द्वारपालों की प्रतिमाएं और अन्य कलाकृतियां मिली हैं, जो उस दौर की उत्कृष्ट शिल्पकला को दर्शाती हैं।

कैसे हुआ खुलासा? वरिष्ठ पुरातत्वविद प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि किसान गीतन के पास खेती के लिए मिट्टी काटने के दौरान अनजाने में जेसीबी (JCB) मशीन का इस्तेमाल किया गया, जिससे ये ऐतिहासिक अवशेष सतह पर आ गए। हालांकि, कुछ हिस्सों को नुकसान भी पहुंचा है, इसलिए अब यहां वैज्ञानिक खुदाई की आवश्यकता है।

 बम्हनी का वो रोचक इतिहास जो आज भी है ज़िंदा

बम्हनी गांव का इतिहास सदियों पुराना है। स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, प्राचीन काल में यहाँ 'पांच देवों की बस्तियां' हुआ करती थीं, जिनमें से कई के प्रमाण आज भी मौजूद हैं:

  1. पचदेवरी: जहां वर्तमान में यह ताजा पुरातात्विक खजाना (मूर्तियां और आमलक) मिला है।

  2. शिवरी नारा: वर्तमान खोज स्थल से 1 किमी दूर, जहां आज भी जमीन से प्राचीन मिट्टी के बर्तन (मृदभांड) निकलते रहते हैं।

  3. जर्शी बहची: 4 किमी दूर स्थित यह स्थान आज भी ग्रामीणों के पारंपरिक देवस्थल का मुख्य केंद्र है।

  4. बम्हेश्वरनाथ महादेव मंदिर: बम्हनी गांव की चौथी प्राचीन देव बस्ती, जो आज भी आस्था का बड़ा केंद्र है।

  5. महामाया मंदिर: पांचवी बस्ती, जिसे प्राचीन काल के पत्थरों को ही आपस में जोड़कर (बिना सीमेंट/गारे के) निर्मित किया गया है।

लोकगाथा

इस ऐतिहासिक टीले के पीछे छत्तीसगढ़ की सबसे प्रसिद्ध लोकगाथा 'लोरिक-चंदा' की अमर प्रेम कहानी भी जुड़ी हुई है।

ग्रामीणों के अनुसार, लोककथा के नायक लोरिक और नायिका चंदा अपने दुश्मनों से बचते हुए इसी भव्य मंदिर के भीतर आकर छिपे थे। जब चंदा के पिता राजा महर को उनके यहां छिपे होने का पता चला, तो वे क्रोध से भर गए। उन्होंने गुस्से में आकर ऐसा अचूक और विनाशकारी 'धनुष-बाण (भष्मक प्रहार)' चलाया कि यह विशाल और भव्य मंदिर पूरी तरह से ध्वस्त होकर ज़मींदोज हो गया। समय के साथ रखरखाव न होने और संरक्षण के अभाव में यह पूरी सभ्यता मिट्टी के एक ऊंचे टीले में तब्दील हो गई।

खुदाई हुई तो बाहर आएगा छत्तीसगढ़ का वैभवशाली प्राचीन शहर

बम्हनी के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। यदि पुरातत्व विभाग यहां वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से विस्तृत खुदाई (Excavation) शुरू करे, तो जमीन के नीचे से एक पूरा प्राचीन शहर और बस्तर व छत्तीसगढ़ की वैभवशाली सभ्यता का बहुत बड़ा राज बाहर आ सकता है।

फिलहाल, संस्कृति मंत्री के आश्वासन के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि इस जगह को जल्द ही 'संरक्षित पुरातात्विक स्थल' घोषित कर फेंसिंग की जाएगी, ताकि छत्तीसगढ़ का यह गौरवशाली इतिहास सुरक्षित रह सके।

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