किन अहम प्रस्तावों पर टिकी हैं नज़रें?
खबरों की मानें तो सरकार इस लघु सत्र के दौरान देश के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करने वाले बड़े कदम उठा सकती है:
महिला आरक्षण विधेयक: सरकार इस सत्र में महिला आरक्षण से जुड़ा ऐतिहासिक संविधान संशोधन बिल पेश कर सकती है।
परिसीमन (Delimitation): इसके साथ ही परिसीमन से जुड़े कानूनी प्रावधानों को भी पटल पर रखे जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
आंकड़े और सियासी समीकरण
संसदीय गणित की बात करें तो सरकार के पास इन महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्याबल मौजूद है। इसके बावजूद, विधायी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए रणनीतिक तैयारी जारी है:
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने विधेयक को सर्वसम्मति या बड़े बहुमत से पास कराने के लिए कई क्षेत्रीय और छोटे राजनीतिक दलों से संपर्क किया है। कई अन्य दलों के साथ भी पर्दे के पीछे बातचीत का दौर जारी है।
कब तक हो सकती है तारीखों की घोषणा?
फिलहाल मानसून सत्र के औपचारिक समापन के बाद अब सभी की निगाहें विशेष सत्र की आधिकारिक तारीखों पर टिकी हैं।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि 26-27 अक्टूबर को संसद परिसर/संविधान सभा में एक अंतर्राष्ट्रीय संसदीय कार्यक्रम (International Parliamentary Event) प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि सरकार इसी वैश्विक आयोजन के आसपास की तिथियों को ध्यान में रखते हुए विशेष सत्र का अंतिम शेड्यूल तय करेगी।
अब देखना यह होगा कि संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से इसकी आधिकारिक अधिसूचना कब जारी की जाती है।






