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रायपुर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कार्यशाला
रायपुर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कार्यशाला
रायपुर संभाग

पर्यावरण संरक्षण : रायपुर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन द्वारा राज्य स्तरीय कार्यशाला में 250 प्रतिभागियो ने लिया भाग 

रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में लगभग 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया और जीरो वेस्ट छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को लेकर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 02 Jul 2026, 11:44 AM · अपडेट: 10 Jul 2026, 07:30 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण और पर्यावरण अनुकूल निस्तारण सहित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन में नागरिकों, स्थानीय निकायों तथा संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता बताई। 

पर्यावरण संरक्षण मंडल देगा तकनीकी मार्गदर्शन

क्षेत्रीय अधिकारी पी.के. रबड़े ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रमुख प्रावधानों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित ये नियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं हैं, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं, जिनका उद्देश्य कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटरों को अपने द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं उठानी होगी। इससे कचरे के बेहतर निस्तारण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। रबड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया है। साथ ही बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सीमेंट संयंत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से तैयार आर.डी.एफ. (Refuse Derived Fuel) का ईंधन के रूप में उपयोग कर वैज्ञानिक कचरा निस्तारण और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। 

250 प्रतिभागियों ने कार्यशाला में भाग लिया 

सामूहिक प्रयासों से रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। कार्यशाला में राज्य सलाहकार मोनिका सिंह एवं पुरुषोत्तम पंडा (स्वच्छ भारत मिशन), कार्यपालन अभियंता योगेश कुमार कडू, मुख्य रसायनज्ञ नीलिमा सोनकर तथा सहायक अभियंता प्रवीण कुमार नाग ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, प्रसंस्करण और व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जेनरेटर, ईको क्लब समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी-कर्मचारी सहित लगभग 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना रहा।
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