Petrol Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। बीते सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 7.6 प्रतिशत बढ़ी, जबकि अमेरिकी क्रूड ऑयल लगभग 10 प्रतिशत महंगा हुआ। इस तेजी के चलते कच्चे तेल का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 92.68 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 91.48 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बावजूद फिलहाल घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मई के बाद से तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं। ऐसे में वाहन चालकों को अभी राहत मिली हुई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो आने वाले दिनों में घरेलू ईंधन की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है।
रोजमर्रा के सामान की कीमत बढ़ने की आशंका
पेट्रोल और डीजल महंगा होने का असर केवल वाहन चलाने के खर्च तक सीमित नहीं रहता। ईंधन की कीमत बढ़ने पर ट्रक और दूसरे मालवाहक वाहनों का परिवहन खर्च बढ़ सकता है। इससे दूसरे राज्यों या दूरदराज के इलाकों से आने वाली सब्जियों, फलों, किराना और अन्य जरूरी सामान की ढुलाई महंगी हो सकती है। इसका असर आगे चलकर इन वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमत क्यों बढ़ सकती है
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता है। पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। ऐसे में दुनिया के बाजार में तेल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी और कच्चे तेल के दाम ऊपर चले गए। इसके अलावा तेल उत्पादक देशों की उत्पादन नीति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग भी कीमतों को प्रभावित करती है।पेट्रोल-डीजल की कीमत क्यों बढ़ सकती है
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारतीय तेल कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसके साथ रुपये की डॉलर के मुकाबले कीमत, टैक्स, रिफाइनिंग और परिवहन खर्च भी पेट्रोल-डीजल की कीमत को प्रभावित करते हैं। हालांकि, कच्चा तेल महंगा होने के तुरंत बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना जरूरी नहीं है, क्योंकि घरेलू कीमतों में कई अन्य कारकों की भी भूमिका होती है।
छत्तीसगढ़ में इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर
छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने पर परिवहन, कृषि, खनन और उद्योग से जुड़े क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। डीजल महंगा होने से ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और कृषि मशीनों के इस्तेमाल की लागत बढ़ सकती है। वहीं, कोयला और अन्य खनिजों की ढुलाई महंगी होने से खनन एवं औद्योगिक गतिविधियों का खर्च भी बढ़ सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ने की संभावना रहती है।आने वाले दिनों में बढ़ सकता है पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव
फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाने को लेकर तेल कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम मौजूदा स्तर के आसपास लंबे समय तक बने रहते हैं, तो घरेलू ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले कुछ हफ्ते पेट्रोल और डीजल की कीमतों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

