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बीमा खत्म तो पेट्रोल-डीजल बंद
बीमा खत्म तो पेट्रोल-डीजल बंद
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सुप्रीम कोर्ट सख्त : बिना इंश्योरेंस सड़कों पर दौड़ रहे 16 करोड़ से ज्यादा वाहन, पेट्रोल पंपों पर लागू हो सकता है नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल नियम

देश में बिना वैध मोटर इंश्योरेंस के चल रहे करोड़ों वाहनों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। अदालत ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन मंत्रालय और IRDAI को ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें पेट्रोल पंपों पर वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस जांचने की व्यवस्था हो सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, बीमा खत्म होने पर वाहन मालिक को ईंधन देने से पहले इंश्योरेंस रिन्यू कराना पड़ सकता है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Aug 2026, 09:47 AM · अपडेट: 30 Oct 2026, 05:35 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
देश भर की सड़कों पर रोजाना गाड़ियों का हुजूम बढ़ता जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी लापरवाही भी सामने आ रही है। लाखों-करोड़ों गाड़ियां बिना किसी वैध कागजात और इंश्योरेंस के बेधड़क दौड़ रही हैं। इस स्थिति पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के चल रहे वाहनों पर अब लगाम लगाना बेहद जरूरी हो गया है। सड़क दुर्घटनाओं और पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे की अनिश्चितता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन मंत्रालय और बीमा नियामक IRDAI को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। 

बीमा खत्म तो नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

इस योजना के तहत पेट्रोल पंपों पर ऐसा सिस्टम तैयार करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे ईंधन भराने आने वाले वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस तुरंत डिजिटल तरीके से चेक हो सके। अगर गाड़ी का बीमा खत्म हो चुका होगा, तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा। वाहन मालिक को ईंधन लेने से पहले अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस रिन्यू कराना होगा। हालांकि, यह अभी कोई अंतिम कानून नहीं है, बल्कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस पर खाका तैयार करने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश हुए आंकड़ों ने सबको हैरान कर दिया। 

आंकड़े चौंकाने वाले: 56 फीसदी गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के

  • देश में करीब 16.54 करोड़ वाहन बिना वैध मोटर इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं।

  • यह आंकड़ा देश के कुल पंजीकृत वाहनों का लगभग 56% हिस्सा है।

  • यानी आधी से ज्यादा गाड़ियां दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित पक्ष को आर्थिक सुरक्षा देने के दायरे से बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे आम जनता की जान-माल की सुरक्षा और पीड़ितों के कानूनी अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना है।

    नई गाड़ियों के नियम भी बदलेंगे

  • नई कार (चार पहिया वाहन): अब 3 के बजाय 4 साल का अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा।

  • नया दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर): अब 5 के बजाय 6 साल का अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कराना होगा।

  • सिस्टम खुद ही डिटेक्ट करेगा 

    बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाई-टेक सिस्टम अपनाने पर जोर दिया है। इसके तहत हाईवे और शहरों में लगे ANPR (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों को केंद्रीय 'वाहन' (VAHAN) डेटाबेस और बीमा कंपनियों के डेटा से जोड़ा जाएगा। इससे जैसे ही कोई बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ी कैमरे के सामने से गुजरेगी, सिस्टम खुद ही उसे डिटेक्ट कर लेगा। साथ ही, ट्रैफिक पुलिस को ऐसे खास डिजिटल ऐप और हैंडहेल्ड डिवाइस दिए जाएंगे, जिनसे ऑन-द-स्पॉट गाड़ी का नंबर डालते ही उसकी इंश्योरेंस की मियाद पता चल जाएगी।
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