प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी, उमस और जल संकट के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) पूरी सक्रियता के साथ कार्य कर रहा है। भीषण गर्मी के इस दौर में ग्रामीणों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभाग की टीम दिन-रात मैदान में जुटी हुई है।
खराब हैंडपंप और पाइपलाइन समस्याओं का तत्काल निराकरण
राज्य शासन द्वारा विभाग के सभी तकनीकी कर्मचारियों और हैंडपंप मैकेनिकों को निर्देश दिए गए हैं कि खराब हैंडपंपों, पाइपलाइन लीकेज और पेयजल व्यवस्था में आने वाली किसी भी बाधा का तुरंत समाधान किया जाए। विभागीय टीमें गांव-गांव पहुंचकर खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत कर रही हैं, ताकि ग्रामीणों को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव के निर्देश पर हो रही लगातार मॉनिटरिंग
उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव के निर्देश पर विभागीय अधिकारी लगातार ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। अधिकारी पेयजल योजनाओं की जमीनी स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे हर ग्रामीण परिवार तक शुद्ध और सुरक्षित पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
जल संरक्षण के लिए ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक
पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ विभाग द्वारा जल संरक्षण को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि आवश्यकता न होने पर नल की टोटी बंद रखें, पानी का दुरुपयोग न करें और जल बचाने की आदत अपनाएं। विभाग यह संदेश भी दे रहा है कि पानी केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है, इसलिए इसका संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।ग्राम समितियों की भागीदारी पर दिया जा रहा जोर
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम गांवों के भ्रमण के दौरान ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्यों के साथ बैठक कर रही है। इन बैठकों में योजनाओं के बेहतर संचालन और रखरखाव में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ग्रामीणों को जल कर संग्रहण के महत्व के बारे में भी बताया जा रहा है, ताकि पेयजल योजनाओं का संचालन लंबे समय तक सुचारू रूप से जारी रह सके।
सोख्ता गड्ढों के निर्माण से बढ़ेगा जल संरक्षण
विभाग द्वारा प्रत्येक घर के नल कनेक्शन के पास सोख्ता गड्ढा बनाने के लिए भी ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है। इससे पानी का संरक्षण होने के साथ-साथ गांवों में स्वच्छता व्यवस्था भी बेहतर होगी। विभाग का मानना है कि जनसहयोग और जागरूकता के माध्यम से ही जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।
