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Trilok Mishra life transformed by the PM Surya Ghar Yojana.(Image Source: CGDPR)
Trilok Mishra life transformed by the PM Surya Ghar Yojana.(Image Source: CGDPR)
केंद्र सरकार

PM Surya Ghar Yojana: बिजली बिल से मिली राहत, छत पर सोलर प्लांट लगाकर त्रिलोक मिश्रा बने आत्मनिर्भर

PM Surya Ghar Yojana: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के त्रिलोक मिश्रा ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाकर अपने घर को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाया है। पहले जहां हर महीने 3 से 3.5 हजार रुपये बिजली बिल आता था, वहीं अब सौर ऊर्जा से बिजली खर्च में बड़ी राहत मिली है।

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प्रकाशित: 25 Sep 2026, 05:32 PM · 6 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
स्रोत: PIB
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
PM Surya Ghar Yojana: कभी हर महीने आने वाला 3 से 3.5 हजार रुपए का बिजली बिल घरेलू बजट पर बोझ बनता था। बिजली की खपत बढ़ने पर बिल बढ़ने की चिंता रहती थी। आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के गुरुकुल परिसर पेंड्रारोड निवासी त्रिलोक मिश्रा के घर की छत ही बिजली उत्पादन का माध्यम बन गई है। 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में केवल बिजली की बचत नहीं हुई, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई शुरुआत हुई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ त्रिलोक मिश्रा को भी मिला है। योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपए की सब्सिडी मिली, जो सीधे उनके बैंक खाते में जमा हुई। मिश्रा इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बताते हैं।

छत बनी बिजली का स्रोत, घटा घरेलू खर्च

सोलर प्लांट लगने से पहले त्रिलोक मिश्रा के घर का मासिक बिजली बिल लगभग 3 हजार से 3 हजार 500 रुपए तक आता था। हर महीने बिजली बिल के लिए अलग से राशि की व्यवस्था करनी पड़ती थी। सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होने के बाद उनके घरेलू बिजली खर्च की तस्वीर बदल गई। अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दिए जाने पर उसकी राशि बिजली बिल में समायोजित होती रही। इससे उन्हें बिजली खर्च में राहत के साथ-साथ अपनी छत पर उत्पादित ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला।यह अनुभव उनके लिए केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। उनके घर की छत अब स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन गई है। इससे उन्हें यह भरोसा भी मिला है कि घर-परिवार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सौर ऊर्जा एक उपयोगी और स्थायी विकल्प बन सकती है।

78 हजार रुपए की सब्सिडी ने आसान किया सौर ऊर्जा का सफर

त्रिलोक मिश्रा के लिए सोलर प्लांट लगाने का निर्णय इसलिए भी आसान हुआ क्योंकि योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपए की सब्सिडी मिली। सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बना रहा। मिश्रा बताते हैं कि सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया उनके लिए सहज रही। उनके अनुसार, योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने सौर ऊर्जा को अपनाने के निर्णय को और आसान बनाया।

PM मोदी का स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का विजन

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अब आम परिवार भी अपनी छत को ऊर्जा उत्पादन के माध्यम के रूप में देख रहे हैं। त्रिलोक मिश्रा का अनुभव इसी बदलाव की एक स्थानीय तस्वीर है। जहां पहले उनकी छत केवल घर का हिस्सा थी, वहीं अब वही छत बिजली पैदा कर रही है। इससे एक ओर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार के बिजली खर्च में भी राहत महसूस हो रही है।

CM साय के नेतृत्व में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से जिले के परिवारों को अपने घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। त्रिलोक मिश्रा की कहानी बताती है कि जब किसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव सीधे परिवार के जीवन में दिखाई देता है। सौर ऊर्जा के माध्यम से उन्हें बिजली खर्च में राहत मिली है और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है।

पर्यावरण के साथ घरेलू बजट के लिए भी राहत

सौर ऊर्जा का लाभ केवल बिजली बिल में कमी तक सीमित नहीं है। यह स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का माध्यम भी है। मिश्रा के घर में सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू होने से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संतोष भी मिल रहा है। वे मानते हैं कि यदि अधिक से अधिक परिवार अपनी छतों पर सोलर प्लांट लगाएं, तो इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

त्रिलोक मिश्रा की छत बनी दूसरों के लिए प्रेरणा

त्रिलोक मिश्रा की कहानी अब आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनका अनुभव बताता है कि सौर ऊर्जा केवल बड़े संस्थानों या उद्योगों तक सीमित नहीं है। सामान्य परिवार भी अपनी जरूरत के अनुसार सोलर प्लांट लगाकर बिजली की जरूरत पूरी करने और घरेलू खर्च को कम करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। एक समय बिजली के बढ़ते बिल की चिंता करने वाले त्रिलोक मिश्रा आज अपनी छत पर बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता के विजन से जुड़ते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी योजनाओं के जमीनी प्रभाव की एक सकारात्मक मिसाल प्रस्तुत करती है। उनके घर की छत से निकल रही सौर ऊर्जा केवल बिजली नहीं बना रही, बल्कि आत्मनिर्भरता, बचत और स्वच्छ भविष्य की नई उम्मीद भी रोशन कर रही है।
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