प्रेस क्लब में नेताओं के बोल
भूपेश बघेल का बयान: बहस में शामिल होने पहुंचे पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा, "आज दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें औपचारिक आमंत्रण नहीं मिला था, बल्कि मीडिया के जरिए समय और जगह की जानकारी मिली। बहस के लिए वे सभी दस्तावेज और आंकड़े साथ लेकर आए हैं।
विजय शर्मा का रुख: डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, "मैंने बहस की कोई औपचारिक चुनौती नहीं दी थी, लेकिन जब लगातार इस मुद्दे पर बयानबाजी हो रही थी, तो हमने तय किया कि एक स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए। पश्चिमी देशों में ऐसी बहस की परंपरा रही है और यह राज्य या देश के लिए एक नई शुरुआत है।"
प्रेस क्लब का रुख: प्रेस क्लब के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि प्रेस क्लब हमेशा स्वस्थ संवाद और चर्चा के लिए एक तटस्थ मंच प्रदान करता है।
आंकड़ों की जंग: किसने क्या कहा?
डिप्टी सीएम विजय शर्मा के प्रमुख दावे:
साय सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख पीएम आवास स्वीकृत किए गए थे।
छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा आवास का काम साय सरकार के कार्यकाल में हुआ है, जहां अब तक 11 लाख से अधिक घर बनकर तैयार हो चुके हैं।
भूपेश सरकार के समय सिर्फ 3 लाख आवास स्वीकृत हुए थे और तत्कालीन सरकार ने शेष आवासों को वापस लौटा दिया।
बघेल सरकार द्वारा पोर्टल बंद होने का दावा पूरी तरह गलत है। पिछली सरकार ने आवास निर्माण का लक्ष्य ही नहीं लिया।
भूपेश बघेल की गणना अशुद्ध है; उनके कार्यकाल में केवल 1.57 लाख पीएम आवास बने थे।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल के पलटवार:
पीएम आवास का इतिहास बताते हुए उन्होंने कहा कि पहले यह 'इंदिरा आवास योजना' थी, जिसे 2014-15 में पीएम आवास नाम दिया गया।
केंद्र सरकार ने 2022-23 में पोर्टल बंद कर दिया था, जिसके चलते तात्कालिक परेशानियां आईं। इसके बावजूद बघेल सरकार ने कोरोना काल में लोन लेकर 2020-21 में 1 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए थे।
साय सरकार द्वारा बताए जा रहे आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र और संसद में दिए गए आंकड़ों में अंतर है।
रमन सिंह की सरकार के दौरान 4 लाख से अधिक का लक्ष्य था, जिसमें 6 हजार से अधिक काम बाकी रह गया था।
मौजूदा सरकार को यह साफ करना चाहिए कि उनके कार्यकाल में वास्तव में कितने नए आवास मंजूर हुए हैं और उनमें से जमीनी स्तर पर कितने पूरे किए गए हैं।
क्या था विवाद का मुख्य कारण?
इस बहस की नींव उस समय पड़ी जब डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने दावा किया कि उनकी सरकार ने पहली ही कैबिनेट में 18 लाख पीएम आवास की फाइल पर हस्ताक्षर किए थे और 11 लाख मकान पूरे भी कर लिए हैं। वहीं, भूपेश बघेल ने इन आंकड़ों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि 11 लाख में से अधिकांश आवास पिछली सरकारों के कार्यकाल में तैयार हो चुके थे।
सार्वजनिक मंच पर हुई इस खुली चर्चा ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में पारदर्शिता और संवाद की एक नई मिसाल पेश की है, हालांकि आंकड़ों को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे बरकरार हैं।

