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X-ray film crisis at Mahasamund Hospital(Image Source: Keertiman Media)
X-ray film crisis at Mahasamund Hospital(Image Source: Keertiman Media)
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Mahasamund Medical College: सरकारी अस्पताल में एक्स-रे सुविधा अधूरी, फिल्म के लिए भटक रहे मरीज

Mahasamund Medical College: सह जिला अस्पताल में करीब एक महीने से एक्स-रे फिल्म का स्टॉक खत्म है। जांच जारी है, लेकिन मरीजों को मूल फिल्म नहीं मिल रही और उन्हें मोबाइल से फोटो लेकर इलाज कराना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन सीजीएमएससी से सप्लाई का इंतजार कर रहा है।

कीर्तिमान डेस्क | यशोदा साहू
15 Sep 2026, 05:41 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Mahasamund Medical College: सह जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक और समस्या सामने आई है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में करीब एक महीने से एक्स-रे फिल्म का स्टॉक खत्म है। हालांकि अस्पताल में एक्स-रे जांच की सुविधा जारी है, लेकिन मरीजों को जांच के बाद एक्स-रे की मूल फिल्म नहीं मिल पा रही है।
मजबूरी में मरीज और उनके परिजन एक्स-रे मशीन की स्क्रीन पर दिखाई जा रही तस्वीर की मोबाइल से फोटो खींचकर अपने साथ ले जा रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है या जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों से आगे इलाज कराना होता है।

रोजाना 70 से 100 मरीज कराते हैं एक्स-रे

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में सामान्य दिनों में हर दिन करीब 70 से 100 एक्स-रे जांच होती हैं। हड्डियों में चोट, फ्रैक्चर, छाती और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों सहित कई अन्य जांचों के लिए बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंचते हैं। एक्स-रे फिल्म उपलब्ध नहीं होने के बावजूद जांच प्रक्रिया रोकी नहीं गई है, लेकिन मरीजों को रिपोर्ट की हार्ड कॉपी नहीं मिल रही है। उन्हें केवल स्क्रीन पर दिख रही तस्वीर का मोबाइल से फोटो लेकर ही काम चलाना पड़ रहा है। रेडियोलॉजी विभाग के कर्मचारियों के अनुसार एक्स-रे फिल्म की कमी को लेकर संबंधित विभाग को चार बार लिखित मांग भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक फिल्म की आपूर्ति नहीं हो सकी है। कर्मचारियों का कहना है कि समय रहते मांग भेज दी गई थी, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

मोबाइल फोटो से सही जांच में आ रही परेशानी

चिकित्सकों का कहना है कि डिजिटल एक्स-रे इमेज उपयोगी होती है, लेकिन मोबाइल कैमरे से स्क्रीन की तस्वीर लेने में कई तकनीकी सीमाएं होती हैं। कैमरे का एंगल, रोशनी और फोटो की गुणवत्ता के कारण कई बार छोटी-छोटी चिकित्सकीय जानकारी साफ दिखाई नहीं देती। इससे हड्डियों में मामूली फ्रैक्चर, फेफड़ों से जुड़ी समस्या या अन्य गंभीर संकेतों को समझने में परेशानी हो सकती है। साथ ही मरीजों के पास इलाज का स्थायी रिकॉर्ड भी नहीं रह पाता। पुराने एक्स-रे की तुलना, दूसरे विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाने, बीमा क्लेम या अन्य मेडिकल दस्तावेजों के लिए भी मूल फिल्म की जरूरत पड़ती है। फिल्म नहीं मिलने से कई मरीजों को दोबारा जांच कराने की स्थिति बन रही है।

निजी जांच केंद्रों का रुख कर रहे मरीज

अस्पताल में एक्स-रे फिल्म नहीं मिलने से कई मरीज निजी जांच केंद्रों पर जाने को मजबूर हैं। खासकर ऐसे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है, जिन्हें रेफर किया गया है और जिन्हें जल्द विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता है। एक मरीज ने बताया कि पैर में चोट लगने के बाद उसने अस्पताल में एक्स-रे कराया था, लेकिन फिल्म नहीं मिली। मोबाइल में फोटो लेकर वह घर लौट गया। बाद में डॉक्टर ने स्पष्ट जांच के लिए मूल फिल्म की जरूरत बताई, जिसके बाद उसे दोबारा निजी सेंटर से एक्स-रे कराना पड़ा।

सीजीएमएससी से सप्लाई का इंतजार

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार एक्स-रे फिल्म की आपूर्ति छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) के रेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत होती है। इस संबंध में सीजीएमएससी अधिकारियों से बातचीत की गई है और जल्द आपूर्ति होने की उम्मीद जताई गई है। प्रबंधन का कहना है कि जब तक सीजीएमएससी की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक अस्पताल अपने स्तर पर फिल्म खरीद नहीं सकता। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन सप्लाई शुरू होने का इंतजार कर रहा है।
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