गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया जन औषधि केंद्र महासमुंद जिला अस्पताल में खुद कई समस्याओं से जूझ रहा है। रेड क्रॉस समिति द्वारा संचालित इस केंद्र के हालिया ऑडिट में दवाइयों की कमी, पर्याप्त जगह का अभाव और कर्मचारियों की कमी जैसी तीन प्रमुख समस्याएं सामने आई हैं।
कीर्तिमान की खास रिपोर्ट में जन औषधि केंद्र की जमीनी हकीकत सामने आई है। पड़ताल में पता चला कि केंद्र में मांग के अनुरूप दवाइयों का स्टॉक नहीं है। सीमित जगह में केंद्र का संचालन किया जा रहा है और पिछले करीब तीन वर्षों से पूरा काम एक ही फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। इन अव्यवस्थाओं का सीधा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जो सस्ती दवाइयों की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं।
जरूरत के मुताबिक नहीं मिल रहीं दवाइयां
जन औषधि केंद्र की सबसे बड़ी समस्या दवाइयों की उपलब्धता बताई जा रही है। दवाइयों की सप्लाई के लिए केवल एक वेंडर अधिकृत है। मांग के अनुरूप सप्लाई नहीं होने के कारण कई बार जरूरत की दवाइयां केंद्र पर उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। इसका असर मरीजों पर पड़ता है। जन औषधि केंद्र पर दवा नहीं मिलने की स्थिति में मरीजों को दूसरी जगह दवा तलाशनी पड़ती है और कई बार बाजार से अधिक कीमत पर दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं।
छोटे से कमरे में चल रहा जन औषधि केंद्र
ऑडिट में दूसरी समस्या जगह की कमी को लेकर सामने आई है। जिला अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र एक छोटे कमरे में संचालित किया जा रहा है। सीमित जगह के कारण दवाइयों का स्टॉक रखने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से संभालने में परेशानी होती है। केंद्र में मरीजों की आवाजाही के बीच उपलब्ध दवाइयों और नए स्टॉक का प्रबंधन भी चुनौती बना हुआ है।
तीन साल से एक फार्मासिस्ट के भरोसे व्यवस्था
कर्मचारियों की कमी भी जन औषधि केंद्र की बड़ी परेशानी है। पिछले करीब तीन वर्षों से केंद्र का पूरा काम एक ही फार्मासिस्ट संभाल रहा है। यहां कोई सहायक कर्मचारी नहीं है।ऐसे में मरीजों को दवाइयां देने के साथ स्टॉक, रिकॉर्ड और इन्वेंट्री से जुड़े काम भी एक ही फार्मासिस्ट को संभालने पड़ रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने पर काम का दबाव और बढ़ जाता है।
सस्ती दवा का उद्देश्य हो रहा प्रभावित
जन औषधि केंद्र शुरू करने का प्रमुख उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराना है। इन केंद्रों पर कई दवाइयां बाजार में उपलब्ध ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी कम कीमत पर मिलती हैं। लेकिन महासमुंद जिला अस्पताल के जन औषधि केंद्र में पर्याप्त स्टॉक नहीं होने से मरीजों को जरूरत की दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में उन्हें मजबूरन बाजार से अधिक कीमत पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इससे मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के केंद्र के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।वेंडर को लेकर राज्य स्तर पर होगी बात
जन औषधि केंद्र की समस्याओं को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव से जानकारी ली गई। वेंडर बदलने के सवाल पर उन्होंने बताया कि यह फैसला जिला स्तर के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इस संबंध में राज्य स्तर पर बात की जाएगी। वहीं, केंद्र के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने को लेकर उनका कहना है कि जिला अस्पताल में पहले से ही विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं के संचालन के लिए कमरों की कमी है। ऐसे में फिलहाल उपलब्ध जगह में ही केंद्र का संचालन किया जा रहा है।
मरीजों को राहत का इंतजार
जन औषधि केंद्र का उद्देश्य मरीजों को कम कीमत पर जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराना है। ऐसे में दवाइयों की पर्याप्त सप्लाई, उचित जगह और जरूरी कर्मचारियों की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। ऑडिट में कमियां सामने आने के बाद अब सवाल है कि इन समस्याओं को दूर करने के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाएंगे और मरीजों को नियमित रूप से जरूरी दवाइयां कब उपलब्ध होंगी।