Mahasamund Ganesh Utsav: कीर्तिमान के रंग गणेश उत्सव के संग: जय माता दी समिति प्रथम, उज्ज्वल द्वितीय और गजशक्ति तृतीय
Mahasamund Ganesh Utsav: महासमुंद में कीर्तिमान के आयोजन कीर्तिमान के रंग गणेश उत्सव के संग में गणेश पंडालों का मूल्यांकन किया गया। जय माता दी गणेशोत्सव समिति प्रथम, उज्ज्वल द्वितीय और गजशक्ति तृतीय रही।
प्रकाशित: 30 Sep 2026, 07:06 PM· 4 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
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Mahasamund Ganesh Utsav: शहर में विभिन्न गणेशोत्सव समितियों द्वारा तैयार किए गए पंडालों और उनकी रचनात्मक प्रस्तुतियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कीर्तिमान द्वारा विशेष आयोजन "कीर्तिमान के रंग गणेश उत्सव के संग" का आयोजन किया गया। इसके तहत कीर्तिमान की टीम ने जिले के विभिन्न गणेश पंडालों का दौरा कर उनकी सजावट, थीम, सामाजिक संदेश, क्रिएटिविटी और आयोजन प्रबंधन का जायजा लिया। पूरे आयोजन के बाद निर्धारित मापदंडों के आधार पर पंडालों को अंक प्रदान किए गए। प्राप्त अंकों के आधार पर तीन उत्कृष्ट पंडालों का चयन किया गया, जिसमें जय माता दी गणेशोत्सव समिति ने प्रथम, उज्ज्वल गणेशोत्सव समिति ने द्वितीय और गजशक्ति गणेशोत्सव समिति ने तृतीय स्थान हासिल किया।
विजेता समितियों को किया गया सम्मानित इन समितियों ने हासिल किए शीर्ष स्थान
आयोजन के तहत मूल्यांकन के बाद परिणाम इस प्रकार रहे—
प्रथम स्थान — जय माता दी गणेशोत्सव समिति
द्वितीय स्थान — उज्ज्वल गणेशोत्सव समिति
तृतीय स्थान — गजशक्ति गणेशोत्सव समिति
पंडालों के मूल्यांकन में केवल सजावट को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि उनकी थीम, पंडाल के माध्यम से दिए जाने वाले संदेश, टीम मैनेजमेंट, क्रिएटिविटी और समिति के सदस्यों की सहभागिता जैसे विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया।
निर्णायक मंडल में ये रहे शामिल
कार्यक्रम के मूल्यांकन के लिए निर्णायक मंडल में ईश्वर सिन्हा, नूकेश चंद्राकर और दाऊलाल चंद्राकर शामिल रहे। वहीं कार्यक्रम के संयोजक की जिम्मेदारी हास्य कवि अजय अटपटु ने संभाली। कीर्तिमान की टीम ने पूरे गणेश उत्सव के दौरान शहर के अलग-अलग पंडालों का भ्रमण किया और निर्धारित पैमानों के आधार पर मूल्यांकन किया।
सामाजिक संदेश को भी मिले प्राथमिकता: नूकेश चंद्राकर
कार्यक्रम के निर्णायक नूकेश चंद्राकर ने कहा कि गणेश उत्सव जैसे आयोजनों में समितियों को साज-सज्जा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक संदेशों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से नशा मुक्ति जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि अलग-अलग गणेश पंडालों और आयोजनों के माध्यम से समाज तक ऐसे संदेश पहुंचाए जाएं तो आने वाले समय में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
यह प्रतिस्पर्धा नहीं, उत्साह बढ़ाने का माध्यम, और समितियों के लिए एक मंच है
प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली जय माता दी गणेशोत्सव समिति के सदस्य बादल मक्कड़ ने कीर्तिमान के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह आयोजन केवल प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि गणेश उत्सव को और अधिक उत्साह, सहभागिता और बेहतर तरीके से मनाने के लिए प्रेरित करने वाला माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समितियों को अपनी तैयारियों और रचनात्मकता को और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वहीं गजशक्ति गणेशोत्सव समिति के सदस्यों ने कहा कि इस आयोजन से न केवल समितियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि महासमुंद की अलग-अलग गणेशोत्सव समितियों को एक मंच भी मिलता है। समिति के सदस्यों के अनुसार, ऐसे आयोजन के माध्यम से समितियां अपने विचार साझा कर सकती हैं और भविष्य में होने वाले आयोजनों को लेकर आपस में चर्चा भी कर सकती हैं।
गणेशोत्सव समितियों को प्रोत्साहित करना उद्देश्य
कीर्तिमान की ओर से बताया गया कि "कीर्तिमान के रंग गणेश उत्सव के संग" आयोजन का मुख्य उद्देश्य महासमुंद में होने वाले ऐसे सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहित करना तथा गणेशोत्सव समितियों का उत्साह बढ़ाना था। आयोजन के माध्यम से समितियों की रचनात्मकता, सहभागिता और सामाजिक संदेशों को सामने लाने का प्रयास किया गया। कीर्तिमान की टीम ने जिले के विभिन्न गणेश पंडालों में पहुंचकर आयोजनों को करीब से देखा और समितियों के प्रयासों को समझा।
कार्यक्रम में शामिल गणेशोत्सव समितियों के सदस्यों ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें आने वाले समय के लिए नई उम्मीद और प्रेरणा मिलती है। समितियों का कहना था कि भविष्य में भी आपसी सहमति और सहभागिता से ऐसे कार्यक्रमों को और बेहतर तरीके से आयोजित किया जा सकता है। समितियों ने यह भी कहा कि ऐसे प्रयासों में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर होने वाले सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रयासों को व्यापक मंच मिल सकता है। कीर्तिमान की ओर से आयोजित यह पहल गणेशोत्सव समितियों के बीच सहभागिता, रचनात्मकता और सामाजिक सरोकारों को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रयास के रूप में सामने आई।