Mahasamund News: सरस्वती शिशु मंदिर में गूंजा वंदे मातरम्, 150वीं वर्षगांठ पर हुआ आयोजन
Mahasamund News: सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नमामि भारतम् कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान करीब 300 विद्यार्थियों, शिक्षकों और नागरिकों ने सामूहिक वंदे मातरम् गायन में भाग लेकर राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक महत्व को याद किया।
प्रकाशित: 25 Sep 2026, 05:07 PM· 3 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
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Mahasamund News: स्थानीय भलेसर मार्ग स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने के अवसर पर भव्य सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के मार्गदर्शन में नमामि भारतम् अभियान के तहत 25 सितंबर 2026 को यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती, ॐ और भारत माता के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलित कर, तिलक लगाकर और पुष्पांजलि अर्पित करके की गई।
देशभर में एक साथ गूंजी राष्ट्रभक्ति की गूंज
कार्यक्रम की रूपरेखा और महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यालय के प्राचार्य देवराज वर्मा ने बताया कि वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में पूरे देश में एक ही समय और एक ही लय में राष्ट्रगीत का गायन किया गया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत देशभर के 25,000 स्थानों पर लगभग 1 करोड़ लोगों ने एक साथ यह गीत गाया। अकेले छत्तीसगढ़ में 1,500 स्थानों पर करीब 5 लाख लोगों ने इसमें भाग लिया, और महासमुंद का यह विद्यालय भी इस ऐतिहासिक पल का गवाह बना।
सामूहिक वंदे मातरम् गायन का आयोजनराष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा
विद्यालय में आयोजित इस समारोह में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के गौरवशाली इतिहास को भी याद किया गया। अतिथियों ने बताया कि प्रसिद्ध बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने वर्ष 1875 में इस गीत की रचना की थी, जिसे बाद में 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया। इसे पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1896 के कोलकाता अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। आजादी के बाद, जनवरी 1950 में संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान ही राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया।
युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय चेतना जगाने का प्रयास
समारोह की मुख्य अतिथि, स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम विद्यालय की प्राचार्या संध्या चंद्राकर ने कहा कि हमें केवल इस गीत को गाना ही नहीं, बल्कि इसके गहरे अर्थ और इतिहास को समझना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने याद दिलाया कि ब्रिटिश शासन के दौरान 'वंदे मातरम' बोलने या गाने पर स्वतंत्रता सेनानियों पर अत्याचार किए जाते थे और कोड़े बरसाए जाते थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आदर्श शिक्षा मंडल समिति के सचिव घनश्याम सोनी ने कहा कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को देश के स्वाधीनता संग्राम से जोड़ना, अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान बढ़ाना और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना है।
सांस्कृतिक प्रस्तुति और आभार
समारोह के दौरान विशेष अतिथि व समिति की उपाध्यक्ष संध्या शर्मा ने स्वयं का लिखा गीत जय हो जय हो वंदे मातरम प्रस्तुत कर वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। अंत में उन्होंने अतिथियों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यालय की वरिष्ठ आचार्या मनोज साहू ने किया। इस दौरान विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों सहित लगभग 300 लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की जानकारी विद्यालय के प्रचार-प्रसार प्रमुख पवन निर्मलकर एवं ललित कुमार सिन्हा द्वारा साझा की गई।