Premanand Maharaj Advice: इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर कम बजट में बनी एक फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा है—'हनुमान अंश'। नीम करोली बाबा के दिव्य जीवन पर आधारित इस फिल्म को महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार किया गया था, लेकिन इसके असर और कमाई ने बड़े-बड़े बॉलीवुड प्रोजेक्ट्स को पीछे छोड़ दिया है। शुरुआती दिनों में धीमी गति से चलने के बाद, 17वें दिन फिल्म ने ऐसा मोड़ लिया कि देखते ही देखते यह 25 दिनों में 50 करोड़ रुपये के धमाकेदार आंकड़े तक पहुंच गई। हालांकि, इस सफलता की कहानी सिर्फ बजट या बॉक्स ऑफिस कलेक्शन तक सीमित नहीं है। इस पूरी यात्रा के पीछे पूज्य प्रेमानंद जी महाराज का वह मार्गदर्शन है, जिसने फिल्म को 'फ्लॉप' होने की कगार से निकालकर 'ब्लॉकबस्टर' बना दिया।
प्रेमानंद महाराज के शरण में जब पहुंचीं निर्माता
फिल्म पर काम शुरू करने से पहले इसकी निर्माता अनुप्रिया नागर ने वृंदावन पहुंचकर प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। बातचीत के दौरान अनुप्रिया जी ने महाराज जी से एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल पूछा—“क्या धार्मिक मार्ग पर रहकर बनाई गई फिल्म एक प्रकार की प्रभु-सेवा बन सकती है?”
इस पर महाराज जी ने फिल्म निर्माताओं को सतर्क करते हुए बहुत गहरी और व्यावहारिक सीख दी।
"लोकप्रियता के चक्कर में महापुरुषों के चरित्र से समझौता न हो"
महाराज जी ने समझाया कि किसी महापुरुष के जीवन पर फिल्म बनाना कोई आम काम नहीं है। उन्होंने कहा:
"महापुरुषों का अनुकरण करना अत्यंत कठिन है। किसी भी संत या महापुरुष का चरित्र देखकर दर्शकों के मन में वैराग्य, भक्ति और ज्ञान का संचार होना चाहिए। फिल्म में कोई भी ऐसा दृश्य या अभिनय नहीं होना चाहिए जो अपराध की श्रेणी में आए।"
उन्होंने निर्माताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि व्यावसायिक सफलता या 'समाज प्रियता' हासिल करने के लिए पटकथा में किसी भी तरह का काल्पनिक या सांसारिक मसाला न जोड़ा जाए।
महाराज जी का स्पष्ट कहना था—"चाहे लोग आपकी फिल्म देखें या न देखें, जो बातें शास्त्रों और इतिहास में प्रमाणित हैं, ठीक वैसा ही पर्दे पर उतारें। अपनी तरफ से कुछ भी घटाना या बढ़ाना अपराध बन सकता है।"

