छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने फिल्मी स्टाइल में की जा रही अवैध लकड़ी तस्करी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (UTR) के बफर जोन में हुई इस कार्रवाई ने मशहूर फिल्म 'पुष्पा' के उस सीन की याद दिला दी, जहाँ तस्करी की लकड़ी को पानी में छिपाया जाता था। तस्करों ने वन अधिकारियों को चकमा देने के लिए सागौन के कीमती लट्ठों को गांव के एक तालाब में डुबोकर रखा था, लेकिन खुफिया तंत्र और खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग) की मदद से इस चालाकी को नाकाम कर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय कनेक्शन से जुड़े इस मामले में अब तक लाखों रुपये की कीमती लकड़ी के साथ-साथ संरक्षित वन्यजीवों के अंग और हथियार भी बरामद किए गए हैं।
तालाब और ज़मीन के नीचे 'पुष्पा' स्टाइल में छिपाया था जखीरा
खुफिया जानकारी के आधार पर जब वन विभाग और गरियाबंद पुलिस की संयुक्त टीम ने ओडिशा सीमा के पास स्थित साहिबिनकाच्छर गांव में दबिश दी, तो वे भी हैरान रह गए। कार्रवाई से घबराकर तस्करों ने सबूत मिटाने के लिए कीमती सागौन की लकड़ियों को गांव के तालाब में डुबो दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि सुरक्षा टीमें पानी के नीचे नहीं देखेंगी।
तालाब से बरामदगी: पानी के भीतर से लगभग 5 घन मीटर सागौन की लकड़ी निकाली गई।
गड्ढों और नालों का सहारा: इसके अलावा तस्करों ने नालों के पास और अपने घरों के परिसरों में गहरे गड्ढे खोदकर लकड़ी के स्लीपरों को ज़मीन के नीचे गाड़ दिया था।
खोजी कुत्ते की भूमिका: वन विभाग के विशेष खोजी कुत्ते (स्निफर डॉग) ने सूंघकर ज़मीन और पानी के भीतर छिपी लकड़ियों के सटीक ठिकानों का पता लगाया।
दो चरणों में हुई बड़ी कार्रवाई
यह पूरा ऑपरेशन बेहद योजनाबद्ध तरीके से चलाया गया, जो इस सप्ताह के अलग-अलग दिनों में अंजाम दिया गया:
प्रथम चरण (5 जून):
शुरुआती इनपुट मिलने के बाद पुलिस ने वन अधिकारियों को अलर्ट किया। 5 जून को एक ग्रामीण के घर और परिसर में छापेमारी कर 6 लाख रुपये मूल्य की 193 सागौन की स्लीपरें और प्रोसेस्ड लकड़ी बरामद की गई। इस दौरान एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
द्वितीय चरण (9 जून):
पहले पकड़े गए आरोपी से पूछताछ के बाद वन विभाग ने कई अन्य संदिग्धों के खिलाफ कोर्ट से सर्च वारंट हासिल किया। 9 जून को जब दोबारा बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई, तो तस्करों में हड़कंप मच गया और उन्होंने माल को तालाब व गड्ढों में छिपाने की कोशिश की। इस दूसरे चरण में 4.56 घन मीटर अतिरिक्त सागौन और बीजा की कीमती लकड़ी जब्त की गई।
ओडिशा से जुड़े हैं तार, घरों में मिले आलीशान सोफा सेट
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों (विभागीय नोट: मूल विवरण में वरुण जैन का पदनाम तकनीकी त्रुटिवश अलग दर्ज था, वे वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में मामले का नेतृत्व कर रहे हैं) के अनुसार, इस तस्करी नेटवर्क के तार पड़ोसी राज्य ओडिशा से जुड़े हुए हैं।
"तलाशी के दौरान ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं जो यह दर्शाते हैं कि यह एक अंतरराज्यीय गिरोह है। तस्कर ओडिशा से अवैध रूप से लकड़ी लाते थे। साहिबिनकाच्छर गांव के कई घरों में सागौन के आलीशान सोफा सेट और फर्नीचर मिले हैं, जो इसी अवैध लकड़ी से तैयार किए गए थे।"
अधिकारियों ने मौके से लकड़ी काटने और उसे फिनिशिंग देने वाली पेट्रोल से चलने वाली आधुनिक आरा मशीन और तीन बड़ी हाथ से चलने वाली आरी भी जब्त की हैं।
लकड़ी तस्करी के साथ वन्यजीव शिकार का भी भंडाफोड़
इस संयुक्त ऑपरेशन में केवल जंगलों की कटाई का मामला ही सामने नहीं आया, बल्कि वन्यजीवों के शिकार से जुड़ा एक खतरनाक नेटवर्क भी उजागर हुआ है:
साही (Porcupine) के अंग बरामद: चार आरोपियों के पास से अवैध सागौन मिला, जबकि तीन अन्य आरोपियों के कब्जे से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की द्वितीय अनुसूची में शामिल संरक्षित जीव 'साही' के शरीर के अंग बरामद हुए।
शिकार के फंदे और पोटाश बम: मौके से शिकार के लिए इस्तेमाल होने वाले लोहे के फंदे जब्त किए गए हैं। पकड़े गए कुछ संदिग्ध पहले भी एक वन्यजीव अपराध में शामिल रहे हैं, जहाँ उन पर जंगली जानवरों को मारने के लिए खतरनाक "पोटाश बम" (विस्फोटक) इस्तेमाल करने का आरोप है।
संवेदनशील बना है 'दक्षिण उदंती' का इलाका
छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर स्थित दक्षिण उदंती का यह क्षेत्र अपने बेहद घने जंगलों और दोनों राज्यों के सुगम रास्तों के कारण हमेशा से तस्करों और शिकारियों के निशाने पर रहा है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी को और कड़ा कर दिया गया है तथा इस मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तलाश तेज कर दी गई है।
