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Growing piles of waste in Raipur(Image Source: social media)
Growing piles of waste in Raipur(Image Source: social media)
रायपुर

Raipur Garbage Crisis: दिवाली की सफाई के बीच कचरा संकट, 400 से बढ़कर 600 हुए खुले डिपो, उठाव पर खड़े हुए सवाल

Raipur Garbage Crisis: दिवाली से पहले रायपुर में घरों की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई के चलते कचरे की मात्रा बढ़ गई है। शहर में खुले कचरा डिपो की संख्या 400 से बढ़कर 600 हो गई है, जबकि कई इलाकों में दो से तीन दिनों तक कचरा नहीं उठने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बूढ़ापारा कलेक्शन सेंटर पर भी कचरे का दबाव बढ़ गया है। सफाई व्यवस्था की समीक्षा के दौरान महापौर मीनल चौबे ने रामकी कंपनी के प्रतिनिधियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि अब कंपनियों को फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद ही भुगतान किया जाएगा।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Nov 2026, 07:58 AM · 5 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Raipur Garbage Crisis: त्योहारों का सीजन शुरू होते ही घरों में साफ-सफाई और रंगाई-पुताई का दौर तेज हो जाता है। लोग अपने घरों को तो चमका लेते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में निकलने वाला अतिरिक्त कचरा अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की सड़कों और निगम व्यवस्था के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। दिवाली की इस बयार के बीच शहर में कचरे के ढेर बेतहाशा बढ़ने लगे हैं, जिससे कलेक्शन सेंटरों और खुले डिपो पर भारी दबाव देखा जा रहा है। आ
लम यह है कि शहर में खुले कचरा डिपो की संख्या जो कभी 400 हुआ करती थी, वह अब बढ़कर सीधे 600 पर पहुंच गई है। यानी महज कुछ ही समय में 200 नए सेंटर और बन गए, लेकिन विडंबना यह है कि कचरा उठाने की रफ्तार इस बढ़ोतरी के मुकाबले काफी पीछे छूट गई है। कई इलाकों में तो स्थिति यह है कि कचरा दो से तीन दिनों तक उठाया ही नहीं जा रहा है।

बढ़ते डिपो और हांफती व्यवस्था 

शहर में खुले कचरे के डिपो का 400 से बढ़कर 600 हो जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि त्योहारी सीजन में सफाई व्यवस्था पर कितना भारी दबाव आ चुका है। कायदे से इन डिपो में आने वाले कचरे को समय पर उठाकर प्रोसेस करने के लिए आगे भेजा जाना चाहिए, मगर जमीनी हकीकत इसके उलट है। शहर के कई हिस्सों से लगातार यह शिकायतें मिल रही हैं कि कचरा कई-कई दिनों तक सड़कों के किनारे या डिपो में ही सड़ रहा है, जिससे आसपास के रहवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बूढ़ापारा सेंटर पर बढ़ी मुश्किलें, पुराने धरना स्थल तक पहुंचा कचरा 

रायपुर के बूढ़ापारा स्थित कचरा कलेक्शन सेंटर की स्थिति इस बदइंतजामी का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई है। यहां सेंटर के अंदर और बाहर कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग चुके हैं। इस संबंध में जब वाहन चालकों से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि पहले उन्हें दिनभर में औसतन दो चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन कचरे का दबाव इतना बढ़ गया है कि अब उन्हें चार से पांच चक्कर काटने पड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि वाहन चालक जैसे ही सेंटर पर कचरा खाली करते हैं, उन्हें बिना एक पल गंवाए दोबारा डोर-टू-डोर कलेक्शन के लिए निकलना पड़ रहा है। हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि कलेक्शन सेंटर के भीतर कचरा रखने की जगह तक नहीं बची है। मजबूरी में अब कचरे को पुराने धरना स्थल पर डालना पड़ रहा है। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि केवल कचरा उठाने की ही नहीं, बल्कि उसे समेटने, जमा करने और तय जगह तक भेजने की पूरी चैन ही चरमरा गई है।

10 जोन, 70 वार्ड और ठेका कंपनियां, फिर भी मॉनिटरिंग पर सवाल 

रायपुर नगर निगम के दायरे में आने वाले 10 जोन और उनके 70 वार्डों में घर-घर से कचरा उठाने का जिम्मा निजी ठेका कंपनियों को सौंपा गया है। इसके बावजूद अगर शहरवासियों को दो से तीन दिन तक कचरे के ढेर के बीच रहना पड़ रहा है, तो जाहिर है कि नगर निगम की निगरानी प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े होते हैं।

यह जांच करना बेहद जरूरी हो गया है कि:

  • क्या वाहन अपने निर्धारित फेरे पूरे कर भी रहे हैं या नहीं?

  • किस वार्ड में गाड़ियां नियमित रूप से पहुंच रही हैं और कहां लापरवाही हो रही है?

  • कलेक्शन सेंटरों से कचरे का समय पर उठाव क्यों नहीं हो रहा है?

महापौर की सख्ती: काम नहीं तो भुगतान नहीं 

सफाई व्यवस्था की इस बिगड़ती तस्वीर ने आखिरकार प्रशासन का ध्यान खींच ही लिया है। हाल ही में समीक्षा बैठक के दौरान महापौर मीनल चौबे ने शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने काम में कोताही बरतने पर 'रामकी' कंपनी के प्रतिनिधियों को कड़ी फटकार लगाई है। महापौर ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए हैं कि शहर के हर घर से शत-प्रतिशत कचरे का उठाव सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब कागजी दावों पर नहीं, बल्कि काम की जमीनी और भौतिक जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन) के बाद ही कंपनियों को भुगतान किया जाएगा। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और "काम नहीं तो भुगतान नहीं" की सख्त नीति पर अमल किया जाएगा। त्योहारों के इस उल्लास के बीच रायपुरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन की इस सख्ती का असर जमीन पर भी दिखेगा और शहर एक बार फिर साफ-सुथरा नजर आएगा।
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