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Security arrangements at the railway station  (Image Source: Keertiman Media)
Security arrangements at the railway station (Image Source: Keertiman Media)
रायपुर

Raipur Railway Station: रिडेवलपमेंट के बीच खुले रास्ते बने चोरों का सेफ जोन, 50 हाईटेक कैमरों का टेंडर अटका

Raipur Railway Station: रिडेवलपमेंट कार्य के बीच यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्टेशन पर चोरी के मामले बढ़ने और केवल 55 पुराने CCTV कैमरों से निगरानी होने के बीच 50 नए AI कैमरों की योजना टेंडर प्रक्रिया में अटकी हुई है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Nov 2026, 09:53 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Raipur Railway Station: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मुख्य रेलवे स्टेशन पर इन दिनों यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे नजर आ रही है। स्टेशन पर चल रहे रीफ्रेमिंग और रिडेवलपमेंट कार्यों के कारण कई नए और खुले रास्ते बन गए हैं, जिनका फायदा उठाकर बाहरी और संदिग्ध लोग धड़ल्ले से अंदर घुस रहे हैं। हालात यह हैं कि रात ढलते ही ये लोग प्लेटफॉर्म्स और वेटिंग हॉल्स पर डेरा जमा लेते हैं। सुरक्षा एजेंसियों की लाख कोशिशों और नाइट गश्त के बावजूद ये असामाजिक तत्व चोरी और मारपीट जैसी वारदातों को बेखौफ अंजाम दे रहे हैं।

चोरी के आंकड़े डराने वाले, साल-दर-साल बढ़ रहे मामले

स्टेशन पर बढ़ती अनधिकृत गतिविधियों का सीधा असर अपराध के आंकड़ों पर दिख रहा है। रेलवे द्वारा साझा किए गए रिकॉर्ड के मुताबिक:

  • वर्ष 2024: चोरी के 154 मामले दर्ज किए गए थे।

  • वर्ष 2025: यह आंकड़ा बढ़कर 158 पर पहुंच गया।

  • वर्ष 2026 (अब तक): मामलों की संख्या बढ़कर 160 तक पहुंच चुकी है, जो सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है।

रात 11 बजे के बाद स्टेशन परिसर से लगातार चोरी और मारपीट की शिकायतें सामने आती हैं। इनमें से कुछ मामले ही रेल पुलिस तक पहुंच पाते हैं, जबकि कई शिकायतें आपसी सुलह या कागजी कार्रवाई के अभाव में वहीं दम तोड़ देती हैं।

सिर्फ 55 पुराने कैमरों के भरोसे पूरी सुरक्षा 

एक तरफ जहां चोरों और संदिग्धों के हौसले बुलंद हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ पूरी तरह बंधे हुए हैं। पूरे स्टेशन की निगरानी का जिम्मा महज 55 पुराने सीसीटीवी कैमरों पर टिका हुआ है। ये कैमरे तकनीकी रूप से इतने पुराने और कम रिजॉल्यूशन वाले हैं कि इनकी फुटेज बेहद धुंधली आती है। रेल पुलिस अधिकारियों का दर्द साफ झलकता है कि वारदात के बाद जब फुटेज खंगाले जाते हैं, तो उनमें संदिग्धों के चेहरे पहचानना भूसे में सुई ढूंढने जैसा साबित होता है। यही वजह है कि ज्यादातर मामलों में पुलिस जांच (विवेचना) बीच में ही अटक जाती है।

क्यों उलझी है 50 हाईटेक एआई कैमरों की टेंडर प्रक्रिया? 

इस गंभीर सुरक्षा चूक से निपटने के लिए रेलवे प्रशासन ने स्टेशन पर 50 नए अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस कैमरे लगाने की योजना बनाई थी। इनके लग जाने से कैमरों की कुल संख्या बढ़कर 105 हो जाती। इन हाईटेक कैमरों की खासियत यह है कि ये भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ किसी भी लावारिस सामान की महज दो घंटे के भीतर सटीक पहचान करने और संदिग्ध चेहरों को आसानी से ट्रैक करने में सक्षम होते। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और पहले दौर के टेंडर में अनुमानित बजट से काफी अधिक दरें आने के कारण यह पूरी योजना फाइलूर में ही उलझकर रह गई है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार? 

"पहले दौर के टेंडर में तय बजट से अधिक दरें आने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब इसे संशोधित कर दोबारा जारी कर दिया गया है। जैसे ही वर्क ऑर्डर फाइनल होगा, मुख्य प्रवेश द्वारों, प्लेटफॉर्म्स और प्रतीक्षालयों (वेटिंग हॉल्स) में नए हाईटेक कैमरे लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।" — रमन कुमार, सीनियर डीएससी
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