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1 जून से राज्यव्यापी हड़ताल
1 जून से राज्यव्यापी हड़ताल
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ब्लैकआउट की आहट : 1 जून से प्रदेशभर के पेट्रोल पंप बंद करने का ऐलान, सरकार को 4 दिन का अल्टीमेटम!

1 जून से संभावित पेट्रोल पंप हड़ताल का खतरा गहराता जा रहा है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार को 4 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर पूरे प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
27 May 2026, 11:31 AM
जयपुर

राजस्थान में एक बार फिर आम जनता और परिवहन व्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने 1 जून से राज्यव्यापी हड़ताल पर जाने की अंतिम चेतावनी दे दी है। तेल कंपनियों की कथित मनमानी, लगातार बढ़ती लागत और पड़ोसी राज्यों की तुलना में अत्यधिक वैट (VAT) के कारण आर्थिक नुकसान झेल रहे पेट्रोल पंप संचालकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा को पत्र सौंपकर 4 दिन का अल्टीमेटम दिया है। यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 1 जून को पूरे प्रदेश में चक्का जाम की स्थिति बन सकती है।

पड़ोसी राज्यों से महंगा ईंधन और 'वैट' (VAT) की मार

पेट्रोल पंप संचालकों का साफ कहना है कि राजस्थान में ईंधन पर लगने वाला वैट पड़ोसी राज्यों (जैसे पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश) की तुलना में बहुत अधिक है।

  • बिक्री में भारी गिरावट: सीमावर्ती जिलों (Border Districts) के लोग अब पड़ोसी राज्यों से ईंधन भरवा रहे हैं।

  • पंप बंद होने की कगार पर: बिक्री घटने से विशेषकर ग्रामीण और छोटे शहरों के पेट्रोल पंप गहरे आर्थिक संकट में हैं।

  • जनता को नुकसान: डीलर्स का दावा है कि अगर सरकार वैट कम करती है, तो न केवल पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा बल्कि प्रदेश में महंगाई से भी बड़ी राहत मिलेगी।

सप्लाई में कटौती से बढ़ी जनता की 'पैनिक बाइंग'

पिछले कुछ दिनों से राजस्थान के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत देखी जा रही है। एसोसिएशन ने इसके लिए सीधे तौर पर तेल कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया है।

डीलर्स का आरोप: "तेल कंपनियां पर्याप्त मात्रा में ईंधन की सप्लाई नहीं कर रही हैं और सीमित कोटा दे रही हैं। इसके कारण कई पंप ड्राई (खाली) हो रहे हैं और वहां लंबी कतारें लग रही हैं।"

इस किल्लत की खबरों के बीच आम जनता में घबराहट (Panic Buying) का माहौल है। लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए दौड़ रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है। इस अफरा-तफरी का खामियाजा पेट्रोल पंप के कर्मचारियों को ग्राहकों के गुस्से के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

बढ़ती लागत vs स्थिर कमीशन

पेट्रोल पंप संचालकों ने अपनी समस्याओं को मुख्य रूप से तीन बिंदुओं में रेखांकित किया है:

समस्या का क्षेत्रजमीनी हकीकत
ऑपरेटिंग कॉस्ट (लागत)बिजली बिल, मशीनों का रखरखाव, सुरक्षा और कर्मचारियों की सैलरी में भारी बढ़ोतरी हुई है।
कमीशनतेल कंपनियों द्वारा डीलर्स के मुनाफे (कमीशन) में लंबे समय से कोई राहत या बढ़ोतरी नहीं की गई है।
कंपनियों का रवैयाडीलर्स का आरोप है कि तेल कंपनियां अपनी मनमानी शर्तें थोप रही हैं और उनकी शिकायतों की सुनवाई नहीं हो रही।

अगर हड़ताल हुई, तो कहाँ-कहाँ थमेंगे पहिए?

यदि 1 जून को समाधान नहीं निकला, तो केवल पेट्रोल पंप बंद नहीं होंगे, बल्कि पूरे राज्य की रफ्तार थम जाएगी:

  1. परिवहन व्यवस्था ठप: निजी वाहनों के साथ-साथ बसों और ट्रकों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित होगी।

  2. सप्लाई चेन पर असर: फल, सब्जी, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो सकती है।

  3. किसानों पर मार: खेती-किसानी के इस मौसम में ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों के लिए डीजल न मिलने से किसानों को भारी नुकसान होगा।

आगे क्या?

एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि 1 जून को न केवल पंप बंद रहेंगे बल्कि जिलों में धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा। मांगें न माने जाने पर इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन समय के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। अब पूरी गेंद राज्य सरकार के पाले में है। देखना यह होगा कि भजनलाल सरकार इस संकट को टालने के लिए क्या कदम उठाती है।

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