छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाला मदननगर गांव इन दिनों बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार फूट पड़ा। मंगलवार को जब सर्वे टीम और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा, तो ग्रामीणों का सब्र टूट गया और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया।
बिना किसी सूचना के जबरन सर्वे थोप रहे
ग्रामीणों और पुलिस बल के बीच हुई तीखी झड़प में SDOP स्तर के अधिकारी समेत कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। दरअसल, SECL द्वारा खदान विस्तार या नई परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम किया जाना है। कुछ दिन पहले जब SECL की टीम गांव में सर्वे के लिए पहुंची थी, तभी से ग्रामीण लामबंद होने लगे थे। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि खेती-किसानी के इस मुख्य सीजन में, बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के, जबरन सर्वे थोपा जा रहा है।

बहस बदली धक्का-मुक्की में
इसी बात से नाराज ग्रामीण पिछले कई दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विरोध जता रहे ग्रामीणों को जब पुलिस ने रोकने की कोशिश की, तो माहौल अचानक बेकाबू हो गया। देखते ही देखते तीखी बहस धक्का-मुक्की और फिर अचानक हमले में बदल गई। अचानक हुए इस अप्रत्याशित हमले से मौके पर मौजूद पुलिस बल में अफरा-तफरी मच गई। खुद को बचाने और भागने की कोशिश में मची भगदड़ के दौरान कई जवान जमीन पर गिर पड़े।
घायलों को पास के स्वास्थ्य केन्द्र में करा रहे इलाज
हमले में कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं और कुछ के सिर फटने की खबर है। झड़प में एक SDOP रैंक के अफसर के भी जख्मी होने की पुष्टि हुई है। घटना की खबर जैसे ही आला अधिकारियों तक पहुंची, पूरे पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी घायल पुलिसकर्मियों को पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मदननगर गांव को छावनी में बदल दिया गया है।
लिखित सहमति नहीं तो सर्वे नहीं
सैकड़ों की संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। फिलहाल बढ़ते तनाव को देखते हुए SECL का सर्वे काम रोक दिया गया है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि जब तक उन्हें पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जानकारी नहीं दी जाती और उनकी लिखित सहमति नहीं ली जाती, तब तक वे अपनी एक इंच जमीन भी सर्वे के लिए नहीं देंगे। स्थिति को सुलझाने के लिए अब प्रशासन, SECL और ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता की तैयारी की जा रही है।