केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने रेशम उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभागीय अधिकारियों को ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रेशम क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता सुधार पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए, ताकि इस क्षेत्र की राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत हो सके। मंत्री ने हथकरघा बुनकरों, शिल्पियों और कारीगरों को आधुनिक डिजाइन विकास और कौशल उन्नयन से जुड़े नियमित प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बदलते बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण से न केवल उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि कारीगरों की आय और रोजगार क्षमता भी बढ़ेगी।
उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
राज्य अतिथि गृह (पहुना) में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने की। बैठक में रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल
विकास और प्राकृतिक रेशों पर चर्चा
बैठक में सिल्क और कॉटन उत्पादों में अन्य प्राकृतिक रेशों के समावेश के जरिए नए और नवाचारपूर्ण उत्पाद विकसित करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। इससे उत्पादों की विविधता बढ़ेगी और बाजार में उनकी स्वीकार्यता भी मजबूत होगी। केंद्रीय मंत्री ने रेशम केंद्रों में रेशम पौधों के साथ फ्लोरीकल्चर और सब्जी उत्पादन की मिश्रित खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
पर्यावरण अनुकूल उत्पादन पर जोर
वस्त्र निर्माण में प्राकृतिक रंगों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी विशेष बल दिया गया। मंत्री ने हल्दी, कत्था, मेहंदी और विभिन्न पुष्पों से प्राप्त प्राकृतिक रंगों के अधिक उपयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई, जिससे पर्यावरण अनुकूल और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार हो सकें।
