अभियोजन के मुताबिक, आरोपी सब इंस्पेक्टर विकेश चौहान की पीड़िता से पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए हुई थी। बातचीत बढ़ने के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। आरोप है कि विकेश ने खुद को तलाकशुदा बताया और पीड़िता को शादी करने का भरोसा दिलाया। इसी विश्वास के आधार पर वह पीड़िता को अपने साथ जगदलपुर लेकर आया। यहां शादी का भरोसा देकर उसने पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में दोनों ने एक मंदिर में विवाह भी किया, जिससे पीड़िता को विश्वास हो गया कि आरोपी ने उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया है। कुछ समय बाद पीड़िता को आरोपी की वैवाहिक स्थिति को लेकर जानकारी मिली तो पूरा मामला सामने आया। उसे पता चला कि विकेश चौहान की पहली पत्नी जीवित है और दोनों के बीच कानूनी रूप से तलाक भी नहीं हुआ है।
पहली पत्नी से नहीं हुआ था तलाक
आरोप है कि पहली शादी कायम रहने के बावजूद उसने खुद को तलाकशुदा बताकर पीड़िता को गुमराह किया और उससे दूसरी शादी कर ली। इसके बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत की। प्रकरण अदालत पहुंचा, जहां अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मामले की सुनवाई की गई। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद सब इंस्पेक्टर विकेश चौहान को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसके कृत्य को गंभीर, अनैतिक और घृणित अपराध माना।फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ठहराया दोषी
न्यायालय ने इस बात को भी गंभीरता से लिया कि आरोपी पुलिस विभाग में पदस्थ लोक सेवक है। अदालत के अनुसार, जिम्मेदार पद पर रहते हुए इस तरह का अपराध किया जाना मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है। अदालत ने दुष्कर्म के मामले में दोषी सब इंस्पेक्टर को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के मामले में उसे 5 साल के कारावास की सजा दी गई। कोर्ट ने दोषी पर कुल 15 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। हालांकि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। इस तरह अदालत के फैसले में अलग-अलग अपराधों के लिए 10 साल और 5 साल की सजा निर्धारित की गई है।


