पुराने मानक को आधार बनाकर नई गणना लागू
जारी आदेश के अनुसार पूर्व में प्रति एकड़ 2 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी वितरण के मानक को आधार बनाकर नई गणना तय की गई है। इसके तहत अब 1 एकड़ वाले किसान को 2 बोरी यूरिया तथा 1 बोरी डीएपी/एनपीके दिया जाएगा। वहीं 2 एकड़ के किसान को 3 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी, 3 एकड़ पर 5 बोरी यूरिया व 2 बोरी डीएपी, 4 एकड़ पर 6 बोरी यूरिया व 2 बोरी डीएपी तथा 5 एकड़ वाले किसानों को 8 बोरी यूरिया और 3 बोरी डीएपी/एनपीके उपलब्ध कराया जाएगा। यह व्यवस्था किसानों की भूमि के अनुसार संतुलित वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।दशमलव गणना को लेकर भी तय हुए स्पष्ट नियम
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसानों के कुल रकबे के अनुसार उर्वरक वितरण की गणना की जाएगी। यदि गणना में दशमलव 1.49 तक आता है तो उसे नीचे की पूर्ण संख्या माना जाएगा, जबकि 1.50 या उससे अधिक होने पर अगली पूर्ण संख्या के आधार पर खाद का वितरण किया जाएगा। इस नियम का उद्देश्य वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और समान बनाना है।
सीमांत, लघु और दीर्घ कृषकों के लिए अलग-अलग व्यवस्था
शासन ने किसानों को उनकी भूमि के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित कर वितरण प्रणाली तय की है। 2.5 एकड़ तक के सीमांत कृषकों को प्राथमिकता के आधार पर एकमुश्त खाद वितरण किया जाएगा।2.5 से 5 एकड़ तक के लघु कृषकों को दो किस्तों में खाद उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें दूसरी किस्त पहली किस्त के 20 दिन बाद दी जाएगी।वहीं 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले दीर्घ कृषकों को तीन समान किस्तों में उर्वरक वितरित किया जाएगा। दूसरी किस्त 20 दिन बाद तथा तीसरी किस्त दूसरी किस्त के 20 दिन बाद प्रदान की जाएगी।समय पर वितरण और खाद संकट रोकने पर जोर
विभाग ने सभी जिला अधिकारियों और सहकारी समितियों को निर्देशित किया है कि सीमांत एवं लघु किसानों को प्राथमिकता देते हुए समय पर उर्वरक वितरण सुनिश्चित किया जाए। शासन ने स्पष्ट कहा है कि जारी आदेशों का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार के खाद संकट का सामना न करना पड़े और कृषि कार्य सुचारू रूप से चल सके।
