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चरागाह बचाने की मांग
महासमुंद

चरागाह भूमि पर रिसॉर्ट निर्माण का विरोध, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की आवंटन रद्द करने की मांग

महासमुंद जिले के ग्राम कोकड़ी के ग्रामीणों ने गांव की चरागाह भूमि को रिसॉर्ट निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवंटित किए जाने का विरोध किया है। ग्रामीणों ने 14 अगस्त 2026 को कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर प्रस्तावित भूमि आवंटन आदेश को निरस्त करने की मांग की। उनका कहना है कि संबंधित जमीन गांव के पशुओं की चराई और निस्तारी के लिए बेहद जरूरी है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
14 Aug 2026, 07:18 PM
महासमुंद
महासमुंद जिले के ग्राम कोकड़ी के ग्रामीणों ने गांव की चरागाह भूमि को रिसॉर्ट निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवंटित किए जाने का विरोध किया है। ग्रामीणों ने 14 अगस्त 2026 को कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर प्रस्तावित भूमि आवंटन आदेश को निरस्त करने की मांग की। उनका कहना है कि संबंधित जमीन गांव के पशुओं की चराई और निस्तारी के लिए बेहद जरूरी है। इसे पर्यटन या उद्योग विभाग को दिए जाने से ग्रामीणों और पशुपालकों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

20.71 हेक्टेयर चरागाह भूमि का मामला

ग्रामीणों के आवेदन के मुताबिक ग्राम कोकड़ी, ग्राम पंचायत खट्टी, तहसील पटेवा में खसरा नंबर 162, 163, 164 और 289 की जमीन स्थित है। इन चारों खसरों का कुल रकबा 20.71 हेक्टेयर बताया गया है। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि घास चरागाह मद में दर्ज है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरी जमीन का उपयोग वर्षों से पशुओं को चराने और गांव की निस्तारी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। 

खसरा नंबर 164 की जमीन पर रिसॉर्ट का प्रस्ताव

आवेदन में बताया गया है कि खसरा नंबर 164 की 11.22 हेक्टेयर भूमि को रिसॉर्ट निर्माण के लिए चिह्नित किया गया है। यह जमीन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को आवंटित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि चरागाह की जमीन पर रिसॉर्ट बनने से पशुओं के लिए उपलब्ध खुला क्षेत्र कम हो जाएगा। इसके साथ ही गांव की पारंपरिक निस्तारी व्यवस्था भी प्रभावित होगी।

पशुओं की चराई का एकमात्र साधन

ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित जमीन गांव के पशुओं की चराई के लिए उपलब्ध एकमात्र सुरक्षित स्थान है। गांव के अधिकांश परिवार कृषि और पशुपालन से जुड़े हुए हैं, इसलिए चरागाह भूमि उनके जीवन और आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि यह जमीन किसी दूसरे कार्य के लिए आवंटित कर दी गई तो पशुपालकों को मवेशियों को चराने के लिए जगह नहीं मिलेगी। इससे पशुपालन पर निर्भर परिवारों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। 

औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग पर आपत्ति

ग्रामवासियों ने मांग की है कि खसरा नंबर 162, 163, 164 और 289 की कुल 20.71 हेक्टेयर चरागाह भूमि को सुरक्षित रखा जाए। इस जमीन का उपयोग किसी औद्योगिक, व्यावसायिक, पर्यटन अथवा अन्य निर्माण कार्य के लिए नहीं किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए वैकल्पिक जमीन का चयन किया जा सकता है, लेकिन पशुओं की निस्तारी के लिए आरक्षित चरागाह भूमि को खत्म करना गांव के हित में नहीं होगा।

कलेक्टर से आवंटन निरस्त करने की मांग

ग्रामीणों ने कलेक्टर से खसरा नंबर 164 की 11.22 हेक्टेयर चरागाह भूमि का प्रस्तावित आवंटन तत्काल निरस्त करने की अपील की है। आवेदन में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र महासमुंद और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के नाम जमीन आवंटित नहीं करने की मांग रखी गई है। समस्त ग्रामवासियों की ओर से सौंपे गए आवेदन में प्रशासन से ग्रामीणों और पशुपालकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जमीन को चरागाह के रूप में संरक्षित रखने का आग्रह किया गया है।
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