ओडिशा स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के एक नए युग में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। राज्य को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासनों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों के विस्तार में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य राज्य के हर शहरी और अर्ध-शहरी हिस्से तक पर्यावरण-अनुकूल ईंधन पहुंचाना है।
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी का बुनियादी ढांचा (पाइपलाइन नेटवर्क) पहले से तैयार है, वहां पात्र तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) उपभोक्ताओं को पीएनजी में स्थानांतरित (माइग्रेट) करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बनाया जाए। इसके लिए सिंगल-विंडो क्लियरेंस और त्वरित कागजी कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
पीएनजी के फायदे: सुरक्षित रसोई, कम खर्च और कालाबाजारी पर लगाम
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पीएनजी पारंपरिक एलपीजी की तुलना में एक बेहद सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक टिकाऊ रसोई ईंधन है। इस पहल के व्यापक आर्थिक और सामाजिक लाभ होंगे:
आयात पर निर्भरता में कमी: इससे देश की आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम होगी।
सब्सिडी का बोझ घटेगा: सरकार पर से एलपीजी सब्सिडी का वित्तीय बोझ कम होगा, जिसका उपयोग अन्य विकास कार्यों में किया जा सकेगा।
कालाबाजारी पर रोक: पाइपलाइन सीधे घर तक पहुंचने से रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत, चोरी और कालाबाजारी पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी।
सीजीडी संस्थाओं के साथ समन्वय के निर्देश
ऊर्जा-कुशल शहरी भविष्य की ओर बढ़ते कदम
नीति निर्माताओं और शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि पीएनजी को बड़े पैमाने पर अपनाने से न केवल राज्य के नागरिकों को निर्बाध (बिना रुके) ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि पारंपरिक, प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। यह कदम ओडिशा को एक ऊर्जा-कुशल, स्मार्ट और कार्बन-न्यूट्रल शहरी भविष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।