अब तक स्वास्थ्य विशेषज्ञ संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को अच्छी सेहत की कुंजी बताते रहे हैं, लेकिन नई वैज्ञानिक रिसर्च यह संकेत दे रही है कि आप क्या खाते हैं, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह भी हो सकता है कि आप कब खाते हैं। हाल के अध्ययनों में भोजन के समय और शरीर की आंतरिक बायोलॉजिकल क्लॉक (सर्केडियन रिदम) के बीच गहरे संबंध की बात सामने आई है शोधकर्ताओं के अनुसार भोजन का समय शरीर की ऊर्जा खपत, ब्लड सुगर नियंत्रण और हार्मोन के संतुलन को प्रभावित करता है। यदि भोजन का समय शरीर की प्राकृतिक बायोलॉजिकल क्लॉक के अनुरूप हो, तो मेटाबॉलिज्म बेहतर तरीके से काम कर सकता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
सर्केडियन रिदम
सर्केडियन रिदम शरीर की 24 घंटे चलने वाली प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जो नींद, जागने, भूख, पाचन और हार्मोन के स्राव को नियंत्रित करती है। सूर्य के प्रकाश और अंधेरे के अनुसार शरीर अलग-अलग संकेत प्राप्त करता है, जिससे उसकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। जब भोजन का समय इस जैविक घड़ी के अनुरूप होता है, तब शरीर पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग कर पाता है। वहीं देर रात भोजन करने या अनियमित समय पर खाने से शरीर की प्राकृतिक प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
ब्लड शुगर और ऊर्जा उत्पादन पर असर
रिसर्च में पाया गया कि भोजन का समय ग्लूकोज होमियोस्टेसिस यानी रक्त में शर्करा के संतुलन को प्रभावित करता है। सुबह और दिन के समय शरीर इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील होता है, जिससे भोजन के बाद शुगर को नियंत्रित करना आसान होता है। इसके विपरीत देर रात भोजन करने पर शरीर की यह क्षमता कम हो सकती है, जिसके कारण रक्त शर्करा का स्तर बढ़ने का जोखिम रहता है। यही वजह है कि कई अध्ययनों में देर रात खाने को मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज से जोड़ा गया है।
मोटापा और हृदय रोगों का खतरा
अध्ययन में यह भी सामने आया कि भोजन के समय को नियमित रखने और दिन के शुरुआती हिस्से में अधिक कैलोरी लेने से वजन नियंत्रण में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और अन्य कार्डियोमेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि शरीर दिन के समय भोजन को अधिक प्रभावी ढंग से पचा और उपयोग कर सकता है, जबकि देर रात भोजन करने पर अतिरिक्त ऊर्जा वसा के रूप में जमा होने की संभावना बढ़ जाती है।
अनियमित भोजन से समस्याए
आज की व्यस्त जीवनशैली में कई लोग नाश्ता छोड़ देते हैं, देर रात भोजन करते हैं या हर दिन अलग-अलग समय पर खाना खाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी आदतें शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती हैं। शिफ्ट में काम करने वाले लोगों, देर रात तक जागने वालों और अनियमित दिनचर्या रखने वाले लोगों में मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक देखा गया है।
क्या कहती है रिसर्च
अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि स्वस्थ जीवनशैली केवल पौष्टिक भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि भोजन का सही समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी के अनुसार भोजन करने से ग्लूकोज नियंत्रण, ऊर्जा उत्पादन और हार्मोन संतुलन में सुधार हो सकता है। शोधकर्ता यह भी स्पष्ट करते हैं कि इस विषय पर अभी और अध्ययन की आवश्यकता है, लेकिन उपलब्ध साक्ष्य संकेत देते हैं कि भोजन के समय में छोटे बदलाव भी लंबे समय में स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
