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रूस का अत्याधुनिक Su-57D स्टील्थ लड़ाकू विमान
रूस का अत्याधुनिक Su-57D स्टील्थ लड़ाकू विमान
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रूस : स्टील्थ जेट के साथ सोर्स कोड भी देगा रूस, भारत के सामने खुला नया  ऑफर

रूस ने अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57D को लेकर भारत के सामने नया प्रस्ताव रखा है। रूस न केवल इस विमान की आपूर्ति करना चाहता है, बल्कि इसके सोर्स कोड और तकनीकी सहयोग की पेशकश भी कर रहा है। हाल ही में पहली उड़ान भरने वाले दो-सीट वाले Su-57D को विशेष रूप से निर्यात बाजार को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा आगे बढ़ता है, तो भारतीय वायुसेना की भविष्य की रणनीतिक क्षमताओं में बड़ा बदलाव आ सकता है।

प्रकाशित: 31 May 2026, 02:52 PM
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AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
भारत अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। चीन के J-20 स्टील्थ फाइटर और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य क्षमताओं को देखते हुए भारत भी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसी बीच रूस ने भारत को अपने उन्नत Su-57D स्टील्थ फाइटर जेट की पेशकश कर दी है। खास बात यह है कि रूस केवल विमान बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि तकनीकी साझेदारी और सोर्स कोड उपलब्ध कराने जैसे दुर्लभ प्रस्ताव भी दे रहा है।

Su-57D

Su-57D रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57 का दो-सीट वाला संस्करण है। इसे विशेष रूप से उन देशों के लिए विकसित किया गया है जो भविष्य में इस विमान को खरीदना चाहते हैं। हाल ही में इस विमान ने अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान पूरी की। परीक्षण उड़ान के बाद रूस के प्रमुख टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने कहा कि यह विमान प्रशिक्षण और परिचालन दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी साबित होगा  दो-सीट वाला संस्करण पायलट प्रशिक्षण को आसान बनाता है और नए ऑपरेटर देशों के लिए विमान को अपनाने की प्रक्रिया को सरल करता है।

रूस भारत को देना चाहता है विमान

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का इतिहास कई दशकों पुराना है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बड़े हिस्से में आज भी रूसी मूल के हथियार और प्लेटफॉर्म शामिल हैं रूस जानता है कि भारत आने वाले वर्षों में उन्नत लड़ाकू विमानों की खरीद और विकास पर बड़ा निवेश करने वाला है। ऐसे में Su-57D भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है रूस की कोशिश है कि भारत इस विमान को खरीदे या फिर इसके निर्माण में भागीदारी करे। इससे रूस को बड़ा निर्यात बाजार मिलेगा और भारत को अत्याधुनिक तकनीक तक पहुंच मिल सकती है।

सोर्स कोड ऑफर

रक्षा क्षेत्र में किसी भी आधुनिक लड़ाकू विमान का सोर्स कोड बेहद संवेदनशील तकनीक माना जाता है। अधिकांश देश इसे साझा करने से बचते हैं। यदि रूस वास्तव में भारत को सोर्स कोड तक पहुंच देने को तैयार होता है, किसी भी आधुनिक लड़ाकू विमान का सोर्स कोड उसकी सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक माना जाता है। आमतौर पर विमान बनाने वाले देश यह तकनीक किसी अन्य देश के साथ साझा नहीं करते, क्योंकि इसी के जरिए विमान के सॉफ्टवेयर, हथियार प्रणाली, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम नियंत्रित होते हैं।

स्वदेशी मिसाइलों  

यदि रूस वास्तव में भारत को Su-57D का सोर्स कोड उपलब्ध कराता है, तो भारतीय वायुसेना अपनी जरूरतों के अनुसार विमान में बदलाव कर सकेगी। भारत स्वदेशी मिसाइलों और हथियार प्रणालियों को सीधे विमान से जोड़ पाएगा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विकसित कर सकेगा और भविष्य में किसी विदेशी कंपनी पर निर्भर हुए बिना विमान के अपग्रेड तथा तकनीकी सुधार भी कर सकेगा। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ऐसा प्रस्ताव भारत की ‘आत्मनिर्भर रक्षा’ और ‘मेक इन इंडिया’ नीति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Su-57D की खासियतें

Su-57D को रूस का सबसे उन्नत पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान माना जाता है। यह अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे दुश्मन के रडार के लिए इसका पता लगाना कठिन हो जाता है। विमान में सुपरसोनिक क्रूज क्षमता, आधुनिक रडार और सेंसर सिस्टम, लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को ले जाने की क्षमता तथा एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड दोनों प्रकार के मिशन संचालित करने की क्षमता मौजूद है। इसके अलावा इसमें नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली और उच्च गतिशीलता जैसी उन्नत खूबियां भी हैं, जो इसे आधुनिक हवाई युद्ध में बेहद प्रभावी बनाती हैं। रूस का दावा है कि Su-57D एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर उन पर सटीक हमला करने में सक्षम है।

भारत के सामने नया विकल्प 

भारत फिलहाल कई समानांतर परियोजनाओं पर काम कर रहा है भारत एक ओर स्वदेशी AMCA स्टील्थ फाइटर विकसित कर रहा है, वहीं जरूरत पड़ने पर Su-57D जैसे विदेशी विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। रूस ने संयुक्त उत्पादन और तकनीकी साझेदारी का भी प्रस्ताव दिया है। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य क्षमताओं को देखते हुए भारत फिलहाल सभी विकल्पों का मूल्यांकन कर रहा है।
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