छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्यों से जुड़े श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर देने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने ऐसे परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए निश्शुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के होनहार बच्चों को संसाधनों की कमी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित होने से बचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना है।
NEET-JEE की नि:शुल्क कोचिंग
'अटल करियर निर्माण योजना' के तहत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 1,000 प्रतिभावान बच्चों को नीट (NEET) और जेईई (JEE) जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इन बच्चों से कोचिंग के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। योजना के जरिए मेडिकल और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा।
खर्च नहीं बनेगा पढ़ाई में बाधा
NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को अक्सर महंगी कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर निर्माण श्रमिक परिवारों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं होता। ऐसे में सरकार की यह योजना प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिए बड़ी मदद साबित हो सकती है। निश्शुल्क कोचिंग मिलने से बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्थित तैयारी करने का अवसर मिलेगा और परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा।बैठक में लिया गया निर्णय
इस महत्वपूर्ण योजना को लेकर निर्णय नवा रायपुर स्थित कार्यालय में आयोजित 'छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल' के पांचवें कार्यकाल की नौवीं बैठक में लिया गया। बैठक में निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। साथ ही श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए नई योजनाओं और सुविधाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 'अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना' को भी मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत राज्य के चयनित 20 उत्कृष्ट विद्यालयों में निर्माण श्रमिकों के बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। योजना के पहले चरण में 200 बच्चों को कक्षा छठवीं में प्रवेश देकर उनकी पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी। इससे श्रमिक परिवारों के बच्चों को स्कूली स्तर से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।
भविष्य संवारने की तैयारी
राज्य सरकार का प्रयास है कि निर्माण श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रभावित न हो। एक तरफ स्कूली शिक्षा के लिए 'अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना' के माध्यम से मदद दी जाएगी, वहीं आगे चलकर मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी उच्च शिक्षा के लिए 'अटल करियर निर्माण योजना' के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इस तरह बच्चों को स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा की प्रवेश परीक्षाओं तक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।संचालन पर भी हुई चर्चा
बैठक में सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रावधानों के अनुसार श्रमिक कल्याण योजनाओं के प्रभावी संचालन को लेकर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने इस बात पर चर्चा की कि योजनाओं की प्रक्रिया को किस तरह अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि पात्र निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों तक सरकारी सहायता समय पर पहुंच सके। इसके साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक उनकी जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
परिवार तक लाभ पहुंचाने पर जोर
बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों और उनके परिवारों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और जनोपयोगी बनाया जाए। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि पात्र श्रमिकों और उनके परिवारों तक समय पर पहुंचे।