गाइए और छा जाइए : ललित राजवंशी बने विजेता, सुरों और संस्कृति के संगम से गूंजा महासमुंद
महासमुंद के आईआर रिजॉर्ट में कीर्तिमान द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय गायन प्रतियोगिता ‘गाइए और छा जाइए’ का भव्य समापन हुआ। तीन दिवसीय इस संगीत महोत्सव में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए 108 प्रतिभागियों ने अपनी गायन प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
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कीर्तिमान न्यूज
10 Jun 2026, 12:52 PM
महासमुंद
छत्तीसगढ़ की छिपी हुई गायन प्रतिभाओं को मंच और पहचान दिलाने के उद्देश्य से कीर्तिमान द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय गायन प्रतियोगिता ‘गाइए और छा जाइए’ का भव्य और यादगार समापन महासमुंद स्थित आईआर रिजॉर्ट में हुआ। तीन दिनों तक चले इस संगीत महोत्सव ने न केवल प्रदेश के युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया, बल्कि यह आयोजन संगीत, संस्कृति और मनोरंजन का ऐसा संगम बन गया, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है।
प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न जिलों से कुल 108 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रारंभिक दौर से लेकर ग्रैंड फिनाले तक प्रतिभागियों ने अपनी मधुर आवाज, सुरों की समझ और मंचीय प्रस्तुति के दम पर दर्शकों और निर्णायकों को प्रभावित किया। कड़े मुकाबले के बाद ललित राजवंशी ने प्रथम स्थान हासिल कर ‘गाइए और छा जाइए अवार्ड’ अपने नाम किया। वहीं कुमकुम मिश्रा द्वितीय और मन साहू तृतीय स्थान पर रहे। इसके अलावा कवलजीत सिंह, दिनेश मरकाम और जिया रानी ध्रुव को रनर-अप के रूप में सम्मानित किया गया।
प्रतिभाओं का उत्सव बना आयोजन
शुरुआत में इसे एक गायन प्रतियोगिता के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे आयोजन आगे बढ़ा, यह प्रदेश की प्रतिभाओं का उत्सव बन गया। महासमुंद, रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, गरियाबंद, बलौदाबाजार और अन्य जिलों से आए प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ में संगीत प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।
तीन दिनों तक मंच पर एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। प्रतिभागियों ने बॉलीवुड गीतों, छत्तीसगढ़ी लोकगीतों, सूफी संगीत, भजन और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां देकर प्रतियोगिता को बेहद रोचक बना दिया। कई प्रस्तुतियों पर दर्शक झूम उठे तो कई गीतों ने भावुक कर दिया।
रियलिटी शो जैसा अनुभव
‘गाइए और छा जाइए’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पेशेवर प्रस्तुति रही। आयोजन को पूरी तरह एक बड़े टीवी रियलिटी शो की तर्ज पर तैयार किया गया था। विशाल म्यूजिकल स्टेज, अत्याधुनिक साउंड सिस्टम, आकर्षक लाइटिंग, लाइव ऑर्केस्ट्रा, एलईडी स्क्रीन और शानदार मंच सज्जा ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।
दर्शकों को ऐसा अनुभव हुआ मानो वे किसी राष्ट्रीय स्तर के संगीत कार्यक्रम का हिस्सा हों। प्रतियोगियों को भी मंच पर अपनी प्रस्तुति देने के दौरान किसी बड़े मंच पर प्रदर्शन करने जैसा अनुभव मिला। आयोजकों की व्यवस्थाओं की दर्शकों और अतिथियों ने खुलकर सराहना की।
तीन चरणों में हुई प्रतियोगिता
प्रतियोगिता को निष्पक्ष और रोचक बनाने के लिए इसे तीन चरणों में आयोजित किया गया। 03 जून को ओपनिंग राउंड, 04 जून को सेमीफाइनल और 05 जून को ग्रैंड फिनाले आयोजित किया गया। प्रत्येक चरण में प्रतिभागियों का मूल्यांकन गायन क्षमता, सुर, ताल, भाव-प्रस्तुति, आत्मविश्वास और मंच संचालन के आधार पर किया गया।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रदेश के अनुभवी कलाकार सुरेंद्र मानिकपुरी, अविनेश कोसे, हेमंत झाबक, शरद मालु और सुषमा मिश्रा शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों को न केवल अंक दिए, बल्कि उन्हें संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
ललित राजवंशी ने जीता खिताब
ग्रैंड फिनाले में सभी प्रतिभागियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, लेकिन ललित राजवंशी की आवाज, सुरों पर पकड़ और आत्मविश्वास ने निर्णायकों को सबसे अधिक प्रभावित किया। उन्होंने पूरे आयोजन के दौरान लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया।
द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कुमकुम मिश्रा ने अपनी सुरीली आवाज और भावपूर्ण गायन से सभी का ध्यान आकर्षित किया। वहीं मन साहू ने अपनी प्रस्तुति के दम पर तीसरा स्थान हासिल किया। रनर-अप रहे कवलजीत सिंह, दिनेश मरकाम और जिया रानी ध्रुव को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला।
दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी बनी आकर्षण
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ और हिंदी फिल्म जगत की कई प्रसिद्ध हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक सतीश जैन और लोकप्रिय विधायक एवं छालीवुड अभिनेता अनुज शर्मा विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए। दोनों अतिथियों ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल ऐसे मंचों की है जो युवाओं को अपनी कला दिखाने का अवसर दें। उन्होंने कीर्तिमान द्वारा किए जा रहे इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं। इसके अलावा फिल्म कलाकार दीपक साहू और दीक्षा जायसवाल ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
संगीत जगत के कलाकारों ने बांधा समां
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध गायक दिलीप षडंगी, सुनील सोनी, कंचन जोशी, अनुराग शर्मा और विवेक शर्मा भी मौजूद रहे। कलाकारों ने प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और संगीत क्षेत्र में सफलता पाने के लिए आवश्यक अनुशासन, अभ्यास और समर्पण पर प्रकाश डाला। उनकी उपस्थिति से प्रतिभागियों को न केवल प्रेरणा मिली, बल्कि उन्हें संगीत जगत के अनुभवी कलाकारों से सीखने का अवसर भी प्राप्त हुआ।
ग्रैंड फिनाले का सबसे यादगार आकर्षण बांसुरी वादन की विशेष प्रस्तुति रही। पद्म विभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के संगत शिष्य पुष्पराज डड़सेना ने अपनी बांसुरी की मधुर धुनों से पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। उनके साथ तबले पर शैलेष वेदव्यास ने शानदार संगत की। जब बांसुरी और तबले का समन्वय मंच पर गूंजा तो दर्शक मंत्रमुग्ध होकर प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। कई लोगों ने इसे कार्यक्रम का सबसे उत्कृष्ट और आत्मिक क्षण बताया।
हास्य और मनोरंजन का भी रहा तड़का
संगीत के साथ-साथ कार्यक्रम में मनोरंजन का भी विशेष ध्यान रखा गया। प्रसिद्ध हास्य कवि अजय अटपटू ने अपनी हास्य कविताओं और व्यंग्यात्मक प्रस्तुतियों से दर्शकों को खूब हंसाया। उनकी प्रस्तुति ने पूरे माहौल को आनंदमय बना दिया।
प्रतिभाओं को मंच देने की सार्थक पहल
कीर्तिमान के संस्थापक डॉ. नीरज गजेंद्र ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल विजेता चुनना नहीं था, बल्कि उन प्रतिभाओं को सामने लाना था जो अवसर के अभाव में अपनी पहचान नहीं बना पातीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांवों और छोटे शहरों में कई ऐसे युवा हैं जिनके पास अद्भुत प्रतिभा है, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिल पाता। उन्होंने बताया कि ‘गाइए और छा जाइए’ के माध्यम से ऐसे कलाकारों को मंच, मार्गदर्शन और पहचान देने का प्रयास किया गया है। भविष्य में भी संस्था इसी प्रकार के सांस्कृतिक और प्रतिभा आधारित आयोजनों का आयोजन करती रहेगी।