IIT Delhi: डायरेक्टर की चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्रों ने आरोप लगाया कि 26 अगस्त को एक बैठक के दौरान सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस के जवान कैंपस में आए और प्रदर्शनकारी छात्रों की रिकॉर्डिंग की। छात्रों का दावा है कि यह उस कथित आश्वासन के विपरीत था, जिसमें कहा गया था कि प्रशासन या दिल्ली पुलिस प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। हालांकि, छात्रों की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर पुलिस या संस्थान की ओर से अलग से प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है।
बाहरी दखल से इनकार
प्रदर्शनकारी छात्रों ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि उनका आंदोलन किसी बाहरी व्यक्ति या संगठन के प्रभाव में चल रहा है। छात्रों ने कहा कि वे ऐसे दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों का कोई राजनीतिक जुड़ाव, कोई छिपा हुआ मकसद और कोई एक नेता नहीं है। छात्रों ने आंदोलन को ‘स्वाभाविक और सामूहिक’ बताते हुए कहा कि यह उनकी साझा मांगों को लेकर किया जा रहा विरोध है।
गौरतलब है कि 22 अगस्त को आईआईटी दिल्ली कैंपस में एमएससी फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, छात्र की मौत परिसर की एक इमारत से गिरने के बाद हुई। मामले की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। छात्र की मौत के बाद आईआईटी दिल्ली में विद्यार्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है।
स्वतंत्र जांच की मांग
छात्र मामले की स्वतंत्र जांच, संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं। आईआईटी दिल्ली ने छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए गठित बाहरी जांच समिति का गुरुवार को पुनर्गठन किया। पुनर्गठित समिति की अध्यक्षता दिल्ली हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त जज जस्टिस मुक्ता गुप्ता करेंगी।प्रदर्शनकारी छात्रों ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि उनका आंदोलन किसी बाहरी व्यक्ति या संगठन के प्रभाव में चल रहा है। छात्रों ने कहा कि वे ऐसे दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों का कोई राजनीतिक जुड़ाव, कोई छिपा हुआ मकसद और कोई एक नेता नहीं है। छात्रों ने आंदोलन को ‘स्वाभाविक और सामूहिक’ बताते हुए कहा कि यह उनकी साझा मांगों को लेकर किया जा रहा विरोध है।
