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Treatment of sick female students at the Sukma Potacabin
Treatment of sick female students at the Sukma Potacabin
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Sukma Potakabin: 47 छात्राओं की बिगड़ी तबीयत, दूषित पानी और खाने पर गहराया शक, अस्पताल में इलाज जारी

Sukma Potakabin: पोलमपल्ली बालिका पोटाकेबिन में दो दिनों के भीतर करीब 47 छात्राएं बीमार पड़ गईं। उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग ने भोजन और पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं।

कीर्तिमान न्यूज
29 Aug 2026, 04:08 PM
सुकमा
Sukma Potakabin: पोलमपल्ली स्थित बालिका पोटाकेबिन आवासीय विद्यालय से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। बीते दो दिनों के भीतर संस्थान की करीब 47 छात्राएं अचानक एक साथ बीमार पड़ गईं, जिससे पूरे इलाके और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पीड़िता छात्राओं को बुखार, उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद आनन-फानन में दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद कुछ छात्राओं की स्थिति में सुधार होने पर उन्हें वापस पोटाकेबिन भेज दिया गया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक 35 छात्राओं का अस्पताल में इलाज जारी था। 

कुमड़े की सब्जी खाते ही बच्चों को उल्टी-दस्त शुरू 

शनिवार की सुबह भी तीन किस्तों में (14, 15 और 06 बच्चों) को एंबुलेंस और अन्य गाड़ियों से अस्पताल लाया गया। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को पोटाकेबिन में छात्राओं को तीनों वक्त खाने में कुमड़े (कद्दू) की सब्जी दी गई थी। इसके कुछ ही समय बाद बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त शुरू हो गए। हालांकि, बीमारी की सही वजह क्या है, यह आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह से साफ हो पाएगा। 

हॉस्टल परिसर में जगह-जगह गंदगी का आलम 

खाद्य सामग्री, पेयजल आपूर्ति और परिसर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई जा रही हैं, क्योंकि हॉस्टल परिसर में जगह-जगह गंदगी का आलम भी देखने को मिला है। बीमार बच्चों में से 'सोड़ी लक्ष्मी' नाम की छात्रा की हालत गंभीर बताई जा रही है। दोरनापाल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए सुकमा जिला अस्पताल रेफर कर दिया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है। 

47 छात्राओं का एक साथ बीमार होना बड़ा सवाल

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है। पोलमपल्ली के इस बालिका पोटाकेबिन में लगभग 560 छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौजूदगी के बावजूद दो दिनों में 47 छात्राओं का एक साथ बीमार होना सुरक्षा और स्वच्छता मानकों पर बड़े सवाल खड़े करता है। हैरानी की बात यह है कि जिला शिक्षा विभाग लगातार आवासीय आश्रमों में साफ-सफाई बनाए रखने और बच्चों को पीने के लिए उबला हुआ (गर्म) पानी देने के कड़े निर्देश जारी करता रहता है। इसके बावजूद धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं। 

सभी बच्चे फिलहाल खतरे से बाहर 

इस घटना के बाद से छात्राओं के परिजनों और अभिभावकों में गहरा आक्रोश और चिंता का माहौल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. दीपेश चंद्राकर के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम तुरंत पोलमपल्ली बालिका पोटाकेबिन पहुंची। डॉक्टर चंद्राकर ने बताया कि सभी बच्चों को आवश्यक दवाइियां दे दी गई हैं और फिलहाल सभी खतरे से बाहर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना को केवल भोजन से जोड़कर देखना जल्दबाज़ी होगी। 

विभाग ने सैंपल टेस्ट के लिए भेजा 

दूषित पानी, मौसमी वायरल इंफेक्शन या कोई अन्य वजह भी इसका कारण हो सकती है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने खाने और पानी के सैंपल ले लिए हैं, जिन्हें लैब टेस्ट के लिए भेजा जा रहा है। अब हर किसी की निगाहें प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही का जिम्मेदार कौन है।
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