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Kathmandu Flood: भीषण बाढ़ और भूस्खलन से 580 से ज्यादा मौतें, सद्गुरु के आश्रम के 77 श्रद्धालुओं समेत 320 भारतीय लापता

Kathmandu Flood: नेपाल और तिब्बत में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन से 584 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 2,400 से अधिक लोग लापता हैं। नेपाल में 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क टूटने के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 77 श्रद्धालु भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत-बचाव अभियान जारी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 29 Aug 2026, 01:07 PM · अपडेट: 12 Oct 2026, 01:28 AM
नेपाल
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

Kathmandu Flood: भारत के पड़ोसी देश नेपाल और उससे सटे तिब्बत के इलाकों में कुदरत के ढाए कहर ने तबाही की खौफनाक तस्वीर पेश की है। मूसलाधार बारिश के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 584 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2,400 से अधिक लोग जिंदगी और मौत के बीच झूलते हुए लापता बताए जा रहे हैं। इस भयानक जलप्रलय की सबसे चिंताजनक बात यह है कि नेपाल में मौजूद कम से कम 320 भारतीय नागरिकों से भी पूरी तरह संपर्क टूट चुका है, जिनकी तलाश में राहत एजेंसियां दिन-रात एक किए हुए हैं। 

579 लोगों के शव हुए बरामद 

आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, इस आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान नेपाल को पहुंचा है, जहां अब तक 579 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 1,924 लोग गायब हैं। वहीं, सीमा पार तिब्बत के इलाकों में भी 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 558 लोग लापता हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, सबसे बदतर हालात देश के मैदानी और पहाड़ी जिलों में हैं।
तबाही के बाद का दृश्य 

अब तक जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार:

  • चितवन: 221 शव मिले

  • नवलपरासी पूर्व: 134 लोगों की मौत

  • गोरखा: 46 मौतें

  • नुवाकोट: 37 शव बरामद

  • धाडिंग, तनहुं, नवलपरासी पश्चिम और रसुवा: दर्जनों लोगों के मारे जाने की खबर है।

और बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा 

पुलिस और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि जलस्तर घटने और सुरंगों (टनल्स) में जमा मलबे को हटाने के बाद मृतकों का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। चीन-नेपाल सीमा के पास आई भीषण बाढ़ के दो दिन बीत जाने के बाद भी आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) के ‘ईशा फाउंडेशन’ से जुड़े 77 तीर्थयात्रियों का कोई सुराग नहीं लग सका है। यह 77 सदस्यीय दल कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर था, तभी अचानक आई बाढ़ में फंस गया। 

ईशा फाउंडेशन के 77 श्रद्धालुओं की नहीं मिली खबर 

ईशा फाउंडेशन की प्रतिनिधि मां गम्भीरी ने अत्यंत भावुक होकर बताया कि बीते 48 घंटों से इन 77 श्रद्धालुओं से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। उनके परिजन लगातार फोन और मैसेज के जरिए कोई खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। परिजनों के लिए यह समय बेहद दर्दनाक और मानसिक तनाव से भरा है। आपदा के तीसरे दिन भी प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। नेपाल सेना के लगभग 2,391 जवानों सहित कुल 7,451 सुरक्षाकर्मियों को बचाव दल में तैनात किया गया है। 

राहत टीमों को मौके पर पहुंचने में मशक्कत 

तटीय इलाकों, भूस्खलन वाले पहाड़ों और हाईवे की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए स्निफर डॉग्स और भारी मशीनों का सहारा लिया जा रहा है। हालांकि, कई इलाकों में सड़कें और नेटवर्क पूरी तरह ठप होने के कारण राहत टीमों को मौके तक पहुंचने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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