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बोटिंग करती मुस्कान समूह की महिलाएं
बोटिंग करती मुस्कान समूह की महिलाएं
राज्य सरकार

सफलता : नाव संचालन से आत्मनिर्भरता तक, महिलाओं ने रचा नया इतिहास

सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम पर मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की 10 महिलाओं ने बोटिंग गतिविधि शुरू कर आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों और कई चुनौतियों के बावजूद समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर नाव संचालन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी संभाली। इस पहल से अब तक लगभग 74 हजार रुपये की आय अर्जित हुई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और आत्मविश्वास बढ़ा है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 02 Jun 2026, 04:49 PM · अपडेट: 09 Sep 2026, 01:22 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम आज सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की जीवंत कहानी बन चुका है। कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश कर रही हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। डैम की शांत जलराशि पर चलती नावें अब केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि संघर्ष, साहस और सफलता की प्रेरक गाथा भी सुनाती हैं। यह सफलता मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की मेहनत और दूरदर्शिता का परिणाम है। समूह की अध्यक्ष सुनीता सिंह और सचिव  यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने पर्यटन क्षेत्र में कदम रखते हुए बोटिंग गतिविधि की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद इन महिलाओं ने अपने हौसले और एकजुटता के बल पर इस कार्य को आगे बढ़ाया और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बना ली।

संघर्ष से सफलता

शुरुआत में यह यात्रा बिल्कुल आसान नहीं थी। संसाधनों की कमी, तकनीकी प्रशिक्षण का अभाव, नाव संचालन की जानकारी न होना और सुरक्षा प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां सामने थीं। लेकिन महिलाओं ने हार मानने के बजाय इन कठिनाइयों को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर बोट संचालन, पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था और सेवा प्रबंधन को खुद संभालना शुरू किया, जिससे धीरे-धीरे व्यवस्था मजबूत होती गई। आज पिलखा डैम में आने वाले पर्यटक उत्साह के साथ बोटिंग का आनंद ले रहे हैं। यह पहल अब एक सफल आजीविका मॉडल बन चुकी है। मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह ने अब तक लगभग 74 हजार रुपये की आय अर्जित की है। यह आय न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का आधार बनी है, बल्कि उनके परिवारों

आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में बढ़ोतरी

मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह पहल आज महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती देने वाला एक सफल मॉडल बन चुकी है।

आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पिलखा डैम

मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिले तो ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह नाव अब केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत पहचान बन चुकी है। स्थानीय स्तर पर इस पहल की सफलता को देखते हुए अब इसके विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ने और अधिक प्रशिक्षण देकर पर्यटन गतिविधियों को और सशक्त बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं

सरकारी योजनाओं का भी मिल रहा लाभ

महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं और आजीविका मिशन की पहल का लाभ भी इन महिलाओं को मिला है। स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों से जुड़कर महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं।

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