बसना जनपद पंचायत में तकनीकी जिम्मेदारियों के आबंटन ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत जारी दो अलग-अलग आदेशों से सामने आया है कि मनरेगा के तकनीकी सहायक संदीप कुमार को उनके मूल विभाग मनरेगा के अंतर्गत एक भी ग्राम पंचायत का तकनीकी प्रभार नहीं दिया गया, जबकि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा आरईएस विभाग की अकेले 57 ग्राम पंचायतों का दायित्व सौंप दिया गया।
यह व्यवस्था अब चर्चा और सवालों का विषय बन गई है। जनपद पंचायत द्वारा 6 जुलाई 2026 को जारी संशोधित आदेश के अनुसार बसना विकासखंड की 102 ग्राम पंचायतों में आरईएस के तकनीकी दायित्वों का वितरण किया गया।
आरईएस की 57 पंचायतों का जिम्मा संदीप कुमार को
आदेश के मुताबिक संदीप कुमार मनरेगा टीए को 57 ग्राम पंचायत, उप अभियंता जयानंद श्रीवास को 24, रानी राय मनरेगा टीए को 9 तथा सुंदरलाल मनरेगा टीए को 12 ग्राम पंचायतों का तकनीकी प्रभार दिया गया है। वहीं मनरेगा के अलग पंचायत आबंटन आदेश पर नजर डालें तो रानी राय को 11 पंचायत, स्नेहा पटेला को 12, तामेश ध्रुव को 14, अंकित यदु को 15, सुंदरलाल को 15, ज्योति नाग को 12, पूर्णिमा ठाकुर को 11 और रमा साहू को 12 ग्राम पंचायतों का आबंटन किया गया है।मनरेगा में संदीप कुमार को नहीं मिली एक भी पंचायत
सबसे अहम तथ्य यह है कि मनरेगा तकनीकी सहायक संदीप कुमार को मनरेगा के अंतर्गत एक भी ग्राम पंचायत नहीं सौंपी गई। यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। जब संदीप कुमार की नियुक्ति मनरेगा तकनीकी सहायक के रूप में है और उन्हें मनरेगा में एक भी पंचायत नहीं दी गई, तो आखिर उन्हें आरईएस विभाग की आधे से अधिक यानी 57 ग्राम पंचायतों का तकनीकी प्रभार किस आधार पर सौंपा गया? दूसरी ओर सबसे अधिक चर्चा का विषय यह है कि जनपद पंचायत में पदस्थ आरईएस उप अभियंता विष्णु नारायण नाथ सिंह राठौर का नाम इस आदेश में कहीं भी शामिल नहीं है। यदि वे वर्तमान में विभाग में पदस्थ हैं, तो उन्हें एक भी ग्राम पंचायत का तकनीकी प्रभार नहीं दिया जाना कई सवाल खड़े करता है।
57 पंचायतों की निगरानी पर खड़े हुए सवाल
आखिर किस प्रशासनिक आधार पर एक मनरेगा तकनीकी सहायक को पूरे विकासखंड की आधे से अधिक पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गई और विभाग के उप अभियंता को तकनीकी दायित्व से अलग रखा गया, इसका जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं है। आरईएस का काम क्या है? 57 पंचायतों की निगरानी कैसे होगी? ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग पंचायतों में बनने वाली सीसी सड़क, पुल-पुलिया, नाली, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी भवन, सामुदायिक भवन, स्टॉप डैम, अमृत सरोवर और अन्य निर्माण कार्यों का सर्वेक्षण, तकनीकी स्वीकृति, लागत अनुमान, माप पुस्तिका एमबी, गुणवत्ता परीक्षण तथा स्थल निरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य करता है। ऐसे में एक व्यक्ति को 57 ग्राम पंचायतों का तकनीकी दायित्व देना व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में निर्माण कार्यों का नियमित निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी निगरानी करना आसान नहीं माना जाता।सीईओ बोले- अनुभव के आधार पर दी गई जिम्मेदारी
ऐसे में कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस संबंध में जनपद पंचायत बसना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पीयूष सिंह ठाकुर ने कहा कि संदीप कुमार अनुभवी और सक्षम तकनीकी सहायक हैं, इसलिए उन्हें अधिक ग्राम पंचायतों का दायित्व सौंपा गया है।
उन्होंने बताया कि उप अभियंता राठौर की कार्यशैली संतोषजनक नहीं होने के कारण उन्हें पंचायतों का आबंटन नहीं दिया गया है तथा उन्हें यहां से पदमुक्त किए जाने के लिए उच्च कार्यालय को पत्राचार भी किया गया है। उप अभियंता की कमी अन्य मनरेगा तकनीकी सहायकों की तुलना में संदीप कुमार के पास अधिक अनुभव है, इसलिए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।