Suicide Cases: आत्महत्या के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच कुल 1566 लोगों ने आत्महत्या की। इस हिसाब से जिले में हर वर्ष औसतन 522 लोगों ने अपनी जान गंवाई। चिंताजनक बात यह है कि वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही 302 मामले सामने आ चुके हैं। उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि पारिवारिक कलह, नशे की लत और आर्थिक परेशानियां आत्महत्या की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। वहीं, प्रेम प्रसंग से जुड़े मामलों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम दर्ज की गई है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 में जिले में आत्महत्या के 506 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 508 हो गई। इसके बाद वर्ष 2025 में 552 लोगों ने आत्महत्या की, जो पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक संख्या रही।
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साल-दर-साल बढ़ता गया आत्महत्या का आंकड़ा
जनवरी से जून तक केवल छह महीनों के भीतर 302 मामले दर्ज हो चुके हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो साल समाप्त होने तक आत्महत्या का आंकड़ा पिछले वर्षों से अधिक हो सकता है। आंकड़ों का सबसे गंभीर पहलू यह है कि बड़ी संख्या में आत्महत्या के मामलों का वास्तविक कारण पता नहीं चल सका। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 में 311, वर्ष 2024 में 415, वर्ष 2025 में 361 और वर्ष 2026 में जून तक 190 मामलों में कारण स्पष्ट नहीं हो पाया। इन आंकड़ों का कुल योग 1277 होता है, जबकि उपलब्ध विवरण में कुल संख्या 1244 बताई गई है।
अधिकांश मामलों में सामने नहीं आ सकी असल वजह
इस अंतर की आधिकारिक स्तर पर पुष्टि आवश्यक है। इतनी बड़ी संख्या में कारणों का पता नहीं चल पाना यह भी दर्शाता है कि आत्महत्या से पहले व्यक्ति किन मानसिक, सामाजिक या व्यक्तिगत परिस्थितियों से गुजर रहा था, इसकी जानकारी परिवार और जांच एजेंसियों को नहीं मिल पाती। जिन मामलों में कारणों का पता चला है, उनमें घरेलू विवाद और पारिवारिक तनाव सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आए हैं।
नशे की लत के कारण 106 लोगों ने गंवाई जान
नशे की लत भी आत्महत्या के मामलों की एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन वर्ष और छह महीनों में नशाखोरी से जुड़ी परिस्थितियों के कारण कुल 106 लोगों ने आत्महत्या की। वर्ष 2023 में 29, वर्ष 2024 में 12 और वर्ष 2025 में 29 मामले दर्ज हुए। वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही यह आंकड़ा बढ़कर 36 हो गया।
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