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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: फ्लैट मिलने के बाद भी बिल्डर पर कर सकेंगे केस, देरी के लिए मिलेगा पूरा मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत के मुताबिक, फ्लैट या मकान का कब्जा मिलने के बाद भी खरीदार सेवाओं में कमी के लिए बिल्डर पर केस कर सकते हैं। कब्जा मिलने में हुई देरी के लिए मुआवजा मांगने का अधिकार हमेशा सुरक्षित रहेगा। इसके लिए खरीदार उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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प्रकाशित: 27 Jun 2026, 03:32 PM · अपडेट: 04 Oct 2026, 01:52 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

घर खरीदारों के हक में देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अगर कोई खरीदार अपने फ्लैट या मकान का कब्जा ले भी लेता है, तो भी वह सेवाओं में कमी के लिए रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्लैट मिलने में हुई देरी के लिए हर्जाना यानी मुआवजा मांगने का अधिकार खरीदारों के पास हमेशा सुरक्षित रहता है और इसके लिए वे उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटा सकते हैं। अदालत के इस फैसले से देश भर के लाखों परेशान मकान खरीदारों को एक बहुत बड़ी राहत मिली है।

बाइस साल पुराने मामले में खरीदार को मिली बड़ी जीत

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के उस पुराने फैसले को पूरी तरह से रद कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि एक बार फ्लैट का कब्जा मिलने के बाद खरीदार उपभोक्ता नहीं रह जाता। अदालत ने इस तर्क को गलत बताया। दिल्ली के पास द्वारका में बने एक हाउसिंग प्रोजेक्ट का यह मामला है, जहां खरीदार को फ्लैट मिलने में बाइस साल की देरी हुई थी। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सुनवाई की और खरीदार की याचिका को हरी झंडी दे दी। अदालत ने माना कि कब्जा मिल जाने से पुराना हक खत्म नहीं हो जाता।

आम भाषा में समझिए क्या था पूरा कानूनी पेंच

अक्सर बिल्डर और खरीदार के बीच मकान बुक करते समय एक समझौता होता है। इस समझौते में एक शर्त होती है जिसे आर्बिट्रेशन क्लॉज यानी आपसी मध्यस्थता की शर्त कहते हैं। इसका आसान मतलब यह है कि विवाद होने पर कोर्ट जाने के बजाय आपस में या किसी तीसरे व्यक्ति की मदद से बात सुलझाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इसी तकनीकी पेंच को दूर करते हुए कहा कि समझौते में लिखी ऐसी कोई भी शर्त किसी खरीदार को अपनी शिकायत लेकर उपभोक्ता अदालत जाने से नहीं रोक सकती। खरीदार सीधे तौर पर जिला या राज्य उपभोक्ता फोरम में जाकर अपनी बात रख सकता है। 

कब्जा मिलने से पहले की अवधि का हर्जाना पाना खरीदार का पक्का अधिकार 

अदालत की पीठ ने इस बात को बहुत गहराई से समझाया कि अपील करने वाले खरीदार की शिकायत सिर्फ घर पाने को लेकर नहीं थी। उसकी मुख्य चिंता यह थी कि उसे मकान बहुत देर से दिया गया और वह इस देरी के समय का मुआवजा पाने का पूरा हकदार है। जजों ने कहा कि देरी का मुआवजा असल में कब्जा मिलने से पहले के समय का होता है, इसलिए बाद में चाबी मिल जाने से खरीदार का अधिकार अपने आप खत्म नहीं हो जाता। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जिला उपभोक्ता फोरम में साल 2005 में दर्ज की गई इस पुरानी शिकायत को दोबारा शुरू करने का आदेश दिया है और फोरम से एक साल के भीतर मामले का निपटारा करने को कहा है।

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