शंभू बॉर्डर पर तनाव : दिल्ली कूच से पहले पुलिस ने रोके किसान, महापंचायत पर संकट
किसानों के दिल्ली कूच से पहले हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया है। अमेरिका के साथ होने वाले समझौते के विरोध में यह महापंचायत बुलाई गई है।
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विशेष संवाददाता
21 Jul 2026, 09:28 AM
दिल्ली
पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा आज 21 जुलाई को दिल्ली में बुलाई गई महापंचायत को रोकने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत लगा दी है। हरियाणा पुलिस ने तड़के ही शंभू बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया है और भारी संख्या में बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं। किसानों का यह जत्था शांतिपूर्ण तरीके से एक दिन की महापंचायत में शामिल होने के लिए दिल्ली की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन पुलिस ने उन्हें सीमा पर ही रोक दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहले से चल रहे प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क नजर आ रही हैं।
क्यों हो रहा विरोध
किसानों के इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच होने वाला प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता यानी एफटीए (FTA) है। किसान नेताओं सरवन सिंह चढूनी और सरवन सिंह पंधेर का कहना है कि अगर इस समझौते के तहत अमेरिका से सस्ते कृषि, डेयरी और पोल्ट्री उत्पाद भारत आए, तो देश के स्थानीय किसानों और मजदूरों की कमर टूट जाएगी। इस महापंचायत में देश भर के करीब 550 किसान संगठन शामिल हो रहे हैं। हालात को देखते हुए हरियाणा में कई बड़े किसान नेताओं को उनके घरों पर ही नजरबंद कर दिया गया है, ताकि प्रदर्शन को नियंत्रित रखा जा सके।
शंभु बार्डर में किसानसीमा पर बढ़ी सख्ती और आम जनता की परेशानी
शंभू बॉर्डर अचानक बंद होने की वजह से पंजाब से हरियाणा और दिल्ली आने वाले रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। बड़े-बड़े ट्रक और गाड़ियां फ्लाईओवर पर ही फंस गई हैं, जिन्हें पुलिस द्वारा वापस यू-टर्न करवाकर भेजा जा रहा है। किसानों का साफ कहना है कि वे कोई अनिश्चितकालीन धरना देने नहीं जा रहे थे, बल्कि केवल एक दिन की महापंचायत में हिस्सा लेकर वापस लौटने वाले थे। इसके बावजूद बॉर्डर पर जिस तरह के कड़े इंतजाम किए गए हैं, उससे आम जनता को भी भारी ट्रैफिक जाम और दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन और किसान नेताओं के अपने-अपने तर्क
प्रशासन का मानना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राजधानी में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। वहीं दूसरी तरफ, किसान नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर कड़ा रोष जताया है। उनका कहना है कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने के अधिकार को भी दबाना चाहती है। पंजाब सीमा पर फंसे किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की बात दोहराई है, लेकिन पुलिस प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई देने के मूड में नहीं दिख रहा है।
यातायात और आगे की स्थितियों पर असर
बॉर्डर सील होने के कारण दोनों राज्यों के बीच सफर करने वाले आम यात्रियों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बाजार और व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर रास्ते इसी तरह बंद रहे, तो सप्लाई चेन पर इसका बुरा असर पड़ेगा। आने वाले कुछ घंटों में यह देखना अहम होगा कि क्या किसान पीछे हटते हैं या कोई नया रास्ता निकालते हैं। स्थिति पर पुलिस और खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर बनी हुई है।