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हाशिमोटो थायरॉइडिटिस की जानकारी
हाशिमोटो थायरॉइडिटिस की जानकारी
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थायरॉइड बीमारी : महिलाओं में बढ़ रहा हाशिमोटो थायरॉइडिटिस का खतरा, जानें कारण और लक्षण

हाशिमोटो थायरॉइडिटिस महिलाओं में पाई जाने वाली सबसे आम ऑटोइम्यून थायरॉइड बीमारी है, जो आगे चलकर हाइपोथायरायडिज्म का कारण बन सकती है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड ग्रंथि को नुकसान पहुंचाने लगता है। थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, ठंड अधिक लगना और मूड में बदलाव इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। समय पर जांच और सही इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
21 Jul 2026, 03:04 PM
नई दिल्ली

हाशिमोटो थायरॉइडिटिस दुनिया में हाइपोथायरायडिज्म का सबसे सामान्य कारण माना जाता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां आयोडीन की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होती है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 7 से 10 गुना अधिक देखी जाती है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड ग्रंथि की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। थायरॉयड से जुड़ी समस्याएं महिलाओं में काफी आम हैं, लेकिन हाशिमोटो थायरॉइडिटिस (Hashimoto’s Thyroiditis) सबसे अधिक पाई जाने वाली ऑटोइम्यून थायरॉइड बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरॉइड ग्रंथि पर हमला करने लगती है। समय के साथ थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है और हाइपोथायरॉइडिज्म विकसित हो सकता है। 

हाशिमोटो का खतरा किन्हें

  • 30 से 60 वर्ष की महिलाएं
  • जिनके परिवार में थायरॉइड बीमारी का इतिहास हो
  • टाइप-1 डायबिटीज के मरीज
  • रूमेटाइड अर्थराइटिस से पीड़ित लोग
  • सीलिएक डिजीज वाले मरीज
  • विटिलिगो या अन्य ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित लोग
  • हाल ही में गर्भावस्था पूरी करने वाली महिलाएं

थायरॉइडिटिस कैसे विकसित होती है?

यह बीमारी किसी एक कारण से नहीं होती, बल्कि कई आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों के मिलकर प्रभाव डालने से विकसित होती है। कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं। परिवार में थायरॉइड या ऑटोइम्यून बीमारी का इतिहास होना महिलाओं में हार्मोनल बदलाव अत्यधिक आयोडीन का सेवन वायरल संक्रमण सेलेनियम या विटामिन डी की कमी पर्यावरणीय कारक विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों में आनुवंशिक संवेदनशीलता होती है, उनमें बाहरी कारण इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर सकते हैं।

थायरॉइडिटिस के शुरुआती लक्षण

इस बीमारी की शुरुआत धीरे-धीरे होती है और शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लग सकते हैं। इसके प्रमुख संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर समय थकान महसूस होना बिना कारण वजन बढ़ना ठंड अधिक लगना बाल झड़नात्वचा का रूखा होना कब्ज की समस्या चेहरे या गर्दन में सूजन ध्यान केंद्रित करने में परेशानी याददाश्त कमजोर होना अनियमित मासिक धर्म मूड में बदलाव या अवसाद

क्या हाशिमोटो ठीक हो सकती है

हाशिमोटो थायरॉइडिटिस का उपचार मरीज की उम्र, लक्षणों और थायरॉइड हार्मोन के स्तर पर निर्भर करता है। अगर थायरॉइड हार्मोन सामान्य है तो कई मामलों में तुरंत उपचार की जरूरत नहीं होती, लेकिन नियमित जांच जरूरी होती है। यदि बीमारी के कारण थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगता है तो दवाओं के जरिए इसकी कमी पूरी की जाती है। इससे थकान, वजन बढ़ना और अन्य लक्षणों में सुधार हो सकता है। कुछ मरीजों में थायरॉइड ग्रंथि बढ़कर गोइटर का रूप ले सकती है, जिसके गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

समय पर जांच से हाशिमोटो को करें नियंत्रित

हाशिमोटो थायरॉइडिटिस महिलाओं में सबसे अधिक पाई जाने वाली ऑटोइम्यून थायरॉयड बीमारी है और यह हाइपोथायरायडिज्म का प्रमुख कारण बन सकती है। लंबे समय तक थकान, बाल झड़ना, ठंड अधिक लगना या वजन बढ़ने जैसे लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेकर थायरॉइड जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और सही उपचार से इस बीमारी को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

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