हाशिमोटो थायरॉइडिटिस दुनिया में हाइपोथायरायडिज्म का सबसे सामान्य कारण माना जाता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां आयोडीन की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होती है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 7 से 10 गुना अधिक देखी जाती है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड ग्रंथि की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। थायरॉयड से जुड़ी समस्याएं महिलाओं में काफी आम हैं, लेकिन हाशिमोटो थायरॉइडिटिस (Hashimoto’s Thyroiditis) सबसे अधिक पाई जाने वाली ऑटोइम्यून थायरॉइड बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरॉइड ग्रंथि पर हमला करने लगती है। समय के साथ थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है और हाइपोथायरॉइडिज्म विकसित हो सकता है।
हाशिमोटो का खतरा किन्हें
- 30 से 60 वर्ष की महिलाएं
- जिनके परिवार में थायरॉइड बीमारी का इतिहास हो
- टाइप-1 डायबिटीज के मरीज
- रूमेटाइड अर्थराइटिस से पीड़ित लोग
- सीलिएक डिजीज वाले मरीज
- विटिलिगो या अन्य ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित लोग
- हाल ही में गर्भावस्था पूरी करने वाली महिलाएं
थायरॉइडिटिस कैसे विकसित होती है?
थायरॉइडिटिस के शुरुआती लक्षण
इस बीमारी की शुरुआत धीरे-धीरे होती है और शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लग सकते हैं। इसके प्रमुख संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर समय थकान महसूस होना बिना कारण वजन बढ़ना ठंड अधिक लगना बाल झड़नात्वचा का रूखा होना कब्ज की समस्या चेहरे या गर्दन में सूजन ध्यान केंद्रित करने में परेशानी याददाश्त कमजोर होना अनियमित मासिक धर्म मूड में बदलाव या अवसाद
क्या हाशिमोटो ठीक हो सकती है
समय पर जांच से हाशिमोटो को करें नियंत्रित
हाशिमोटो थायरॉइडिटिस महिलाओं में सबसे अधिक पाई जाने वाली ऑटोइम्यून थायरॉयड बीमारी है और यह हाइपोथायरायडिज्म का प्रमुख कारण बन सकती है। लंबे समय तक थकान, बाल झड़ना, ठंड अधिक लगना या वजन बढ़ने जैसे लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेकर थायरॉइड जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और सही उपचार से इस बीमारी को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।