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कुरंदी में मिले बाघ के पंजे के निशान
कुरंदी में मिले बाघ के पंजे के निशान
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बाघ की आहट : बस्तर के दरभा में वन्यजीव की हलचल, बाघ होने की आशंका पर अलर्ट जारी

बस्तर के दरभा क्षेत्र के कुरंदी गांव में बड़े आकार के ताजा पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। करीब 10 साल बाद क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की आशंका जताई जा रही है। ट्रैप कैमरों और वैज्ञानिक जांच के जरिए पगमार्क की पुष्टि की जा रही है, जबकि ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
09 Jul 2026, 11:21 AM
जगदलपुर
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दरभा क्षेत्र में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी को लेकर हलचल बढ़ गई है। कुरंदी गांव के आसपास खेतों और जंगल से लगे इलाकों में बड़े आकार के ताजा पंजों के निशान मिलने के बाद वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है। करीब एक दशक बाद इस इलाके में बाघ के संभावित मूवमेंट की खबर सामने आई है।
ग्रामीणों की सूचना के बाद वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और पगमार्क की जांच शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि निशान देखने में बड़े वन्यजीव के लग रहे हैं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ये बाघ के ही हैं या किसी अन्य जानवर के। इसकी पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है।

खेतों और जंगल के रास्तों पर मिले निशान

कुरंदी गांव के ग्रामीणों ने बताया कि जंगल से लगे खेतों के पास बड़े आकार के ताजा पंजों के निशान दिखाई दिए हैं। निशान काफी स्पष्ट होने के कारण ग्रामीणों में बाघ की मौजूदगी को लेकर चिंता बढ़ गई है। एहतियात के तौर पर लोगों ने शाम के बाद जंगल की ओर जाना कम कर दिया है। ग्रामीण अब अपने मवेशियों को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर बांध रहे हैं। वन विभाग ने भी लोगों से सतर्क रहने और जंगल क्षेत्र में अकेले जाने से बचने की अपील की है। कुरंदी क्षेत्र में करीब 10 साल पहले भी बाघ की गतिविधियां दर्ज की गई थीं। उस दौरान एक ग्रामीण पर हमले की घटना भी सामने आई थी। अब दोबारा इसी इलाके में बड़े पगमार्क मिलने से वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ा दी है।
बाघ

केकरा-चेरबेहार से कुरंदी तक मूवमेंट की आशंका

वन विभाग के अनुसार, कुछ दिन पहले दरभा क्षेत्र के केकरा-चेरबेहार इलाके में भी एक बड़े वन्यजीव की गतिविधि सामने आई थी। संभावना जताई जा रही है कि वही वन्यजीव अब कुरंदी क्षेत्र की ओर बढ़ा हो सकता है। हालांकि विभाग ने अभी तक इसे बाघ की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है।
वन विभाग की विशेष ट्रैकिंग टीमें लगातार जंगल में सर्चिंग अभियान चला रही हैं। वन्यजीवों की आवाजाही वाले संभावित रास्तों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा मिले पगमार्क का प्लास्टर कास्ट तैयार कर विशेषज्ञों से जांच कराई जा रही है, ताकि जानवर की सही पहचान हो सके। वन अधिकारियों के मुताबिक बारिश के मौसम में मिट्टी नरम हो जाती है और पानी भरने के कारण पंजों के निशान का आकार बदल सकता है।

ग्रामीणों को सावधानी बरतने की अपील

ऐसे में केवल पगमार्क देखकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। इसलिए वैज्ञानिक तरीके से जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। वन विभाग ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे अकेले जंगल की ओर न जाएं, बच्चों पर विशेष निगरानी रखें और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखें। किसी भी तरह की वन्यजीव गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने कहा गया है। पांच से अधिक टीमें कर रहीं निगरानी वन विभाग के अनुसार क्षेत्र में पांच से अधिक विशेष ट्रैकिंग टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई गई है और जरूरत के अनुसार ट्रैप कैमरों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। फिलहाल किसी कैमरे में बाघ की स्पष्ट तस्वीर या वीडियो रिकॉर्ड नहीं हुआ है, लेकिन पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है।
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