ग्राम पंचायत बोइरगांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ रहे शिक्षक एनएस ठाकुर (नोहर सिंह ठाकुर) पिछले माह ही शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए हैं। सरकारी सेवा की जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद भी उनका विद्यालय और विद्यार्थियों से रिश्ता आज भी कायम है। वे समय निकालकर विद्यालय पहुंचते हैं और बच्चों के बीच बैठकर उन्हें अध्यापन कराने के साथ-साथ उनका मार्गदर्शन भी कर रहे हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद सामान्यतः शिक्षक अपनी वर्षों की सेवा पूरी कर घर लौट जाते हैं, लेकिन नोहर सिंह ठाकुर का विद्यालय और बच्चों के प्रति लगाव उन्हें दोबारा स्कूल तक खींच लाता है। बच्चों के बीच पहुंचकर उन्हें पढ़ाना और उनके सवालों का समाधान करना उनके लिए किसी औपचारिक जिम्मेदारी से अधिक शिक्षा के प्रति समर्पण बन चुका है।
रिटायरमेंट के बाद भी जारी है ज्ञान बांटने का सफर
विद्यालय में शिक्षकों की कमी भी एक महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे समय में लंबे समय तक अध्यापन का अनुभव रखने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक का बच्चों के बीच पहुंचना विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है। ठाकुर अपने अनुभव के आधार पर बच्चों को विषय संबंधी जानकारी देने के साथ पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करने और आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन भी देते हैं। हालांकि वे अब शासकीय सेवा का हिस्सा नहीं हैं, फिर भी विद्यालय आकर बच्चों को पढ़ाने का उनका निर्णय यह बताता है कि एक सच्चे शिक्षक के लिए शिक्षा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी के प्रति जिम्मेदारी भी है।बच्चों से आज भी जुड़ा गुरु का रिश्ता
ठाकुर के सेवानिवृत्त होने के बाद भी बच्चों का उनसे लगाव कम नहीं हुआ है। विद्यालय में उनके पहुंचते ही बच्चे उनसे बातचीत करते हैं और पढ़ाई से संबंधित अपनी जिज्ञासाएं उनके सामने रखते हैं। वर्षों तक बच्चों के साथ बिताए समय के कारण शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच बना यह आत्मीय संबंध आज भी दिखाई देता है। बच्चों के लिए वे केवल विषय पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणा देने वाले गुरु के रूप में जुड़े हुए हैं।
ग्रामीणों में शिक्षक के प्रति सम्मान
ग्राम बोइरगांव में भी नोहर सिंह ठाकुर के प्रति सम्मान का भाव दिखाई देता है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक के रूप में वर्षों तक बच्चों को शिक्षा देने के बाद सेवानिवृत्ति के पश्चात भी विद्यालय और विद्यार्थियों से जुड़े रहना उनके शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है। ग्रामीण परिवेश में जहां बच्चों की शिक्षा के लिए हर सकारात्मक प्रयास महत्वपूर्ण होता है, वहां ठाकुर का अपने अनुभव और समय को बच्चों के लिए समर्पित करना समाज के लिए भी एक प्रेरणादायी उदाहरण है।सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षा सेवा जारी
नोहर सिंह ठाकुर की कहानी इस बात की मिसाल है कि सरकारी सेवा की अवधि समाप्त हो सकती है, लेकिन गुरु का रिश्ता सेवानिवृत्त नहीं होता। जिस विद्यालय में उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय बच्चों को शिक्षित करने में लगाया, आज भी उसी विद्यालय के बच्चों के बीच पहुंचकर वे अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी यह पहल न केवल विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को यह संदेश भी देती है कि शिक्षा के क्षेत्र में दिया गया योगदान केवल नौकरी की अवधि तक सीमित नहीं होता। एक शिक्षक अपने ज्ञान और अनुभव से सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज और विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा दे सकता है।