बदलाव : 2026-27 से 75% उपस्थिति अनिवार्य, अभिभावकों तक पहुंचेगी रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग ने 2026-27 सत्र के लिए नया शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया है, जिसके तहत कॉलेजों में अनुशासन और पढ़ाई व्यवस्था को सख्त किया गया है। अब प्रत्येक विषय में 75% उपस्थिति अनिवार्य होगी और कम उपस्थिति होने पर अभिभावकों को सूचना भेजी जाएगी।
छत्तीसगढ़ के महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पढ़ाई और अनुशासन को लेकर बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए एकेडमिक कैलेंडर में नियमित उपस्थिति, समयबद्ध कक्षाएं और सतत मूल्यांकन प्रणाली को प्राथमिकता दी गई है। विभाग का दावा है कि इससे कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन दोनों में सुधार होगा।
नए नियमों के अनुसार अब प्रत्येक विषय में 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। यदि किसी विद्यार्थी की उपस्थिति इससे कम होती है, तो उसकी जानकारी सीधे अभिभावकों को भेजी जाएगी। यह व्यवस्था केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि परिवार को भी छात्र की उपस्थिति स्थिति से नियमित रूप से अवगत कराया जाएगा।
प्रवेश प्रक्रिया और कक्षाओं का टाइमटेबल तय
शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार स्नातक और स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश प्रक्रिया 15 जून से शुरू होकर 31 जुलाई तक चलेगी। वहीं नियमित कक्षाएं 1 जुलाई से प्रारंभ होंगी। कॉलेजों को प्रतिदिन कम से कम सात घंटे संचालन करना अनिवार्य होगा और प्रत्येक पीरियड की अवधि एक घंटे निर्धारित की गई है। हर सेमेस्टर में कम से कम 90 शैक्षणिक दिवस सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। यदि किसी कारणवश पढ़ाई के दिन कम होते हैं तो उनकी भरपाई अतिरिक्त कक्षाओं के माध्यम से करनी होगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि समयबद्ध पढ़ाई सुनिश्चित करना कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
लगातार मूल्यांकन प्रणाली से घटेगा परीक्षा का दबाव
नई व्यवस्था में केवल अंतिम परीक्षा पर निर्भरता कम की जाएगी। सितंबर और अक्टूबर में आंतरिक टेस्ट आयोजित किए जाएंगे, जबकि असाइनमेंट और सेमिनार को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया है। इससे छात्रों की पढ़ाई का निरंतर आकलन हो सकेगा और परीक्षा के समय अचानक बढ़ने वाला तनाव कम होगा।
नए शैक्षणिक सत्र में उपस्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। किसी भी विषय में 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति होने पर सीधे अभिभावकों को सूचना भेजी जाएगी। विभाग का उद्देश्य केवल अनुशासन लागू करना नहीं, बल्कि छात्रों और परिवार के बीच शैक्षणिक संवाद को मजबूत करना भी है।
इंटर्नशिप और सह-शैक्षणिक गतिविधियों पर जोर
नए कैलेंडर में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। षष्ठम सेमेस्टर के छात्रों के लिए 10 कार्यदिवस की इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है। इसके साथ ही खेल, सांस्कृतिक गतिविधियां, एनसीसी-एनएसएस शिविर और वार्षिकोत्सव जैसी गतिविधियों को भी समयबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों में नियमित अध्ययन की आदत विकसित करेगा और शैक्षणिक परिणामों में सुधार लाएगा। साथ ही यह प्रणाली कॉलेजों में अनुशासन और गुणवत्ता दोनों को मजबूत करने में मदद करेगी।