Water Conservation: सूरजपुर मॉडल की देशभर में गूंज, देश में चौथा और छत्तीसगढ़ में पहला स्थान हासिल किया
Water Conservation: सूरजपुर जिले ने जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण में जिले को देश में चौथा और छत्तीसगढ़ में पहला स्थान मिला। जिले में 5,429 जल संरचनाएं विकसित कर 94.89 लाख घन मीटर जल भराव क्षमता तैयार की गई, जिससे 5,608 हेक्टेयर से अधिक सिंचित क्षेत्र बढ़ा है।
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कीर्तिमान डेस्क | धनेश्वरी साहू
05 Sep 2026, 02:52 PM
रायपुर
Water Conservation: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले ने जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सफलता की अमिट छाप छोड़ी है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण के तहत सूरजपुर ने देश भर में चौथा स्थान और राज्य में पहला स्थान प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर मॉडल की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखकर इसे किसान, ग्राम पंचायत, जल सखी और जल मित्र के सहयोग से एक जनांदोलन का रूप दिया गया है।
जल संरक्षण में सूरजपुर का जलवा, देश में चौथा और छत्तीसगढ़ में पहला स्थानजल संरक्षण अभियान के प्रमुख आंकड़े
निर्मित संरचनाएं 5,429 (अमृत सरोवर, तालाब गहरीकरण, फार्म पॉन्ड, रिचार्ज पिट, कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम) निर्मित की गई। इनकी जल भराव क्षमता 94.89 लाख घन मीटर है। इससे सिंचित रकबे में बढ़ोतरी 5,608.26 हेक्टेयर की हुई। सभी जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग और नियमित समीक्षा की जा रही है।
जनभागीदारी और प्रशासनिक प्रयास
कलेक्टर सूरजपुर रेना जमील ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि जल संरक्षण प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जिले के ग्रामीणों और किसानों ने अपनी भूमि उपलब्ध कराकर और श्रमदान देकर इस अभियान को सफल बनाया है। जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि प्रधानमंत्री के कैच द रेन - जहां जल गिरे, वहीं सहेजें के संदेश को धरातल पर उतारते हुए पंचायत स्तर पर जल सुरक्षा और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका में प्रत्यक्ष सुधार आ रहा है।