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झारखंड की 6 बेटियां भारतीय U-18 हॉकी टीम में चयनित
झारखंड की 6 बेटियां भारतीय U-18 हॉकी टीम में चयनित
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एशिया कप : जापान में चमकेगा झारखंड का दम! भारतीय अंडर-18 महिला हॉकी टीम में राज्य की 6 बेटियों का चयन

झारखंड की 6 बेटियों का चयन भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम में हुआ है, जो जापान में आयोजित एशिया कप 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। सिमडेगा समेत राज्यभर में खुशी का माहौल है। खिलाड़ियों की मेहनत और संघर्ष को झारखंड की हॉकी संस्कृति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

कीर्तिमान नेटवर्क
24 May 2026, 06:23 AM
📍 रांची

रांची, 23 मई। हॉकी की धरती कहे जाने वाले झारखंड ने एक बार फिर पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। राज्य की 6 प्रतिभाशाली बेटियों का चयन भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम में हुआ है, जो जापान में आयोजित होने वाले महिला अंडर-18 एशिया कप 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस बड़ी उपलब्धि के बाद पूरे झारखंड, खासकर हॉकी की नर्सरी माने जाने वाले सिमडेगा जिले में उत्सव जैसा माहौल है। खेल प्रेमी, कोच, परिवार और स्थानीय लोग इन बेटियों की सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं। Hockey India द्वारा घोषित भारतीय टीम में झारखंड की खिली कुमारी, सुगन सांगा, नीलम टोपनो, श्रुति कुमारी, संदीपा कुमारी और पुष्पा मांझी को शामिल किया गया है। एक साथ 6 खिलाड़ियों का राष्ट्रीय टीम में चयन होना न केवल राज्य के लिए बल्कि भारतीय महिला हॉकी के भविष्य के लिए भी बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

हॉकी में नई चमक

झारखंड का सिमडेगा जिला लंबे समय से भारतीय हॉकी की प्रतिभाओं का केंद्र रहा है। यहां के गांवों और छोटे कस्बों से निकलकर कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है। संसाधनों की कमी के बावजूद यहां के बच्चों में हॉकी के प्रति जुनून देखने लायक होता है। गांव के मैदानों, मिट्टी के छोटे खेल परिसर और बांस की स्टिक से शुरू होने वाला सफर अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच रहा है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि झारखंड की बेटियों में स्वाभाविक खेल प्रतिभा, फिटनेस और संघर्ष करने की क्षमता बेहद मजबूत होती है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य से महिला हॉकी खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ी है।

संघर्ष के बाद मिली सफलता

भारतीय टीम में जगह बनाने वाली कई खिलाड़ी बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। कुछ खिलाड़ियों के माता-पिता खेती करते हैं, तो कुछ मजदूरी या छोटे व्यवसाय से परिवार चलाते हैं। सीमित सुविधाओं के बावजूद इन बेटियों ने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं होने दिया। सुबह जल्दी उठकर अभ्यास करना, कई किलोमीटर दूर मैदान तक पहुंचना, पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना और आर्थिक परेशानियों से जूझते हुए लगातार मेहनत करना — इन खिलाड़ियों के संघर्ष की कहानी प्रेरणादायक है। कोचों के अनुसार इन खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। फिटनेस कैंप और ट्रायल के दौरान भी इन बेटियों ने अपने खेल से सभी को प्रभावित किया।

जापान में होगा एशिया कप

महिला अंडर-18 हॉकी एशिया कप 29 मई से 6 जून 2026 तक जापान के काकामिगाहारा शहर में आयोजित किया जाएगा। इस टूर्नामेंट में एशिया की कई मजबूत टीमें हिस्सा लेंगी। भारत के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और अन्य देशों की टीमें भी खिताब के लिए चुनौती पेश करेंगी। भारतीय टीम ने हाल ही में भोपाल में हाई-परफॉर्मेंस कैंप में हिस्सा लिया था, जहां खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कराई गई। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अभ्यास मैचों और विशेष ट्रेनिंग सत्रों के जरिए टीम को मानसिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया गया।

संदीपा कुमारी पर रहेंगी खास नजरें

सिमडेगा जिले की संदीपा कुमारी को टीम में फॉरवर्ड खिलाड़ी के रूप में शामिल किया गया है। संदीपा भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी संगीता कुमारी की छोटी बहन हैं। हॉकी परिवार से आने वाली संदीपा बचपन से ही खेल के माहौल में पली-बढ़ीं और कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा दिखाने लगी थीं। कोचों का मानना है कि उनकी गति, गेंद पर नियंत्रण और आक्रामक खेल शैली भारतीय टीम के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकती है। अभ्यास मैचों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।

झारखंड में खुशी का माहौल

खिलाड़ियों के चयन की खबर सामने आते ही राज्यभर में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय खेल संगठनों, स्कूलों और हॉकी अकादमियों में जश्न का माहौल देखा गया। खिलाड़ियों के परिवारों को लगातार बधाइयां मिल रही हैं। राज्य सरकार और खेल विभाग ने भी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी हैं। कई जनप्रतिनिधियों और खेल अधिकारियों ने कहा कि यह उपलब्धि झारखंड के खेल ढांचे और प्रतिभा का प्रमाण है।

महिला हॉकी की नई झारखंड

 झारखंड अब भारतीय महिला हॉकी की सबसे मजबूत नर्सरी बनकर उभर रहा है। राज्य में आदिवासी इलाकों से निकलने वाली बेटियां अपनी मेहनत और खेल प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय टीमों में लगातार जगह बना रही हैं। हॉकी को लेकर यहां का जुनून इतना गहरा है कि कई गांवों में बच्चे क्रिकेट से ज्यादा हॉकी खेलना पसंद करते हैं। यही कारण है कि राज्य लगातार भारतीय हॉकी को नई प्रतिभाएं दे रहा है।

भविष्य को लेकर बढ़ी उम्मीदें

अगर इन खिलाड़ियों को लगातार बेहतर सुविधाएं, आधुनिक प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में इनमें से कई खिलाड़ी सीनियर भारतीय महिला हॉकी टीम की अहम सदस्य बन सकती हैं। यह उपलब्धि केवल एक चयन नहीं, बल्कि उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है जो छोटे गांवों और सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। अब पूरे देश की नजर जापान में होने वाले एशिया कप पर टिकी है, जहां झारखंड की ये बेटियां भारतीय तिरंगे का मान बढ़ाने के लिए मैदान में उतरेंगी। भारतीय हॉकी प्रशंसकों को उम्मीद है कि ये खिलाड़ी अपने शानदार प्रदर्शन से देश को नई सफलता दिलाएंगी।

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