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पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री
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बाबा बागेश्वर की महासाधना : हिमालय की बर्फीली चोटियों पर बनाई कुटिया पर साधना, 21 मई को पूर्ण होगी 11 दिनों की तपस्या

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों बद्रीनाथ धाम के पास हिमालय की वादियों में 11 दिनों की कठिन “बद्रीनाथ एकात्मय साधना” कर रहे हैं। 10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर एक साधारण कुटिया में रहकर वे भगवान विष्णु की आराधना और ध्यान में लीन हैं। उनकी साधना 21 मई को पूर्ण होगी। इस दौरान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें वे बर्फीले पहाड़ों के बीच ध्यानमग्न नजर आ रहे हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 19 May 2026, 11:45 AM · अपडेट: 01 Oct 2026, 09:27 AM
बदरीनाथ धाम
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

अपने बयानों और दिव्य दरबार को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों एक बिल्कुल अलग रूप में नजर आ रहे हैं। बाबा बागेश्वर इस समय उत्तराखंड में चार धामों में से एक, पावन बदरीनाथ धाम के पास हिमालय की गोद में बेहद कठिन "बद्रीनाथ एकात्मय साधना" में लीन हैं।

समुद्र तल से 10 हजार फीट से भी अधिक की ऊंचाई पर, जहां हाड़ कंपाने वाली बर्फीली हवाएं चलती हैं और ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, वहां पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक साधारण सी कुटिया बनाकर रह रहे हैं। सांसारिक चमक-दमक से दूर, पहाड़ों के दुर्गम रास्तों के बीच बाबा बागेश्वर की यह अनूठी साधना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।

21 मई को समाप्त होगी 11 दिनों की कठोर तपस्या

मिली जानकारी के अनुसार, बाबा बागेश्वर की यह बेहद गोपनीय और कठिन साधना कुल 11 दिनों की है, जो आगामी 21 मई को संपन्न होने जा रही है। इस दौरान वे पूर्णतः एकांतवास में हैं और भगवान विष्णु की आराधना में डूबे हुए हैं।

बर्फीली वादियों से तस्वीरें हुईं वायरल

साधना के बीच बाबा बागेश्वर की कुछ दुर्लभ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में वे सफेद रंग के कपड़ों में, बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच ध्यानमग्न नजर आ रहे हैं। बागेश्वर धाम के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर इन तस्वीरों को साझा करते हुए एक बेहद आध्यात्मिक पोस्ट लिखी गई है:

"श्री बद्री विशाल में 'बद्रीनाथ एकात्मय साधना' भगवान विष्णु की आराधना और हिमालय की उच्च चेतना द्वारा आध्यात्मिक मार्ग, आध्यात्मिक जागृति, सांसारिक बंधनों से मुक्ति (मोक्ष) और ध्यान में अपार एकाग्रता है। अलौकिक, अखंड हिमालय की शांत और दिव्य वादियों में पूज्य सरकार की इस साधना से जन कल्याण एवं मानव उत्थान का नया आयाम बनेगा।"

साधना के बीच देश के रक्षकों और संतों से की मुलाकात

कठोर तपस्या के नियमों का पालन करने के साथ-साथ बाबा बागेश्वर का राष्ट्रप्रेम भी यहां देखने को मिला। अपनी साधना के दौरान उन्होंने देश की सीमाओं पर मुस्तैदी से तैनात भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात की।

  • जवानों का जाना हाल-चाल: बाबा ने बेहद विषम परिस्थितियों में देश की रक्षा कर रहे जवानों का हौसला बढ़ाया, उनसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और उनका कुशलक्षेम जाना।

  • साधु-संतों से धर्म संवाद: इस हिमालयी प्रवास के दौरान उन्होंने क्षेत्र के कई अन्य उच्च कोटि के साधु-संतों से भी भेंट की। बर्फबारी के बीच संतों के साथ बैठकर उन्होंने सनातन धर्म, अध्यात्म और मानव कल्याण से जुड़े गूढ़ विषयों पर संवाद किया।

क्यों खास है यह साधना?

विशेषज्ञों और आध्यात्मिक गुरुओं का मानना है कि बदरीनाथ क्षेत्र की उच्च चेतना और हिमालय का वातावरण ध्यान की गहराइयों में जाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। बाबा बागेश्वर द्वारा की जा रही इस "बद्रीनाथ एकात्मय साधना" का मुख्य उद्देश्य खुद को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर लोक-कल्याण की ऊर्जा को संचित करना है।

अब करोड़ों भक्तों की नजरें 21 मई पर टिकी हैं, जब बाबा अपनी इस 11 दिनों की महासाधना को पूर्ण कर वापस लौटेंगे।

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