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भूलने की बीमारी
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याददाश्त : कमजोर होने के पीछे क्या हैं कारण? जानिए बचाव के तरीके

भारत में भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया और अल्जाइमर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में लाखों बुजुर्ग इससे प्रभावित हैं। बढ़ती उम्र, तनाव, खराब जीवनशैली, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और नींद की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, नियमित व्यायाम, मानसिक गतिविधियां और संतुलित आहार से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बादाम, अखरोट, हरी सब्जियां, फल, दूध, मछली और ओमेगा-3 युक्त भोजन दिमाग को स्वस्थ रखने में मददगार माना जाता है।

कीर्तिमान नेटवर्क
11 May 2026, 05:23 PM
📍 नई दिल्ली

 भारत में भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ती चिंता बनती जा रही हैं। बदलती जीवनशैली, बढ़ती उम्र, तनाव, खराब खानपान और बीमारियों के कारण बड़ी संख्या में लोग याददाश्त कमजोर होने की समस्या से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।

अध्ययनों के अनुसार भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 88 लाख लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में बीमारी की पहचान देर से होती है, क्योंकि लोग इसे सामान्य बढ़ती उम्र का हिस्सा मान लेते हैं।

क्या होती है भूलने की बीमारी

भूलने की बीमारी या डिमेंशिया ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। कई मामलों में मरीज रोजमर्रा के काम भी भूलने लगता है। अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार माना जाता है।

भारत में क्यों बढ़ रहे हैं मामले

विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं। बढ़ती उम्र इसका सबसे बड़ा कारण माना जाता है, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी याददाश्त कमजोर होने की शिकायत बढ़ रही है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान, शराब, शारीरिक निष्क्रियता और सामाजिक अलगाव भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाते हैं।

इसके अलावा विटामिन B12 की कमी, एनीमिया, थायरॉयड की समस्या और अत्यधिक तनाव भी याददाश्त को प्रभावित कर सकते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।

भूलने की बीमारी के शुरुआती संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बार-बार चीजें भूलने लगे, सामान रखकर भूल जाए, परिचित रास्ते भूलने लगे, बातचीत में शब्द याद न आएं या निर्णय लेने में परेशानी हो, तो यह शुरुआती संकेत हो सकते हैं। मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन और सामाजिक दूरी बनाना भी इसके लक्षण माने जाते हैं।

क्या है इसका इलाज और बचाव?

डॉक्टरों का कहना है कि डिमेंशिया का पूरी तरह इलाज हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन समय रहते पहचान होने पर इसकी गति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, मानसिक गतिविधियां, अच्छी नींद, तनाव नियंत्रण और स्वस्थ खानपान इसके खतरे को कम करने में मदद करते हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही रोजाना पढ़ना, नई चीजें सीखना, लोगों से बातचीत करना और दिमागी खेल खेलना भी दिमाग को सक्रिय रखने में मददगार माना जाता है।

क्या खाएं ताकि दिमाग रहे तेज

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थ याददाश्त को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हल्दी और काली मिर्च का सेवन दिमाग के लिए फायदेमंद माना जाता है। बादाम, अखरोट, बीन्स, चना, राजमा, हरी सब्जियां, फल, मछली, अंडे और दूध जैसे खाद्य पदार्थ मस्तिष्क को जरूरी पोषण देते हैं।

विटामिन B12, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार दिमागी कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। डॉक्टर जंक फूड, अत्यधिक चीनी और धूम्रपान से बचने की सलाह देते हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में जागरूकता की कमी के कारण लोग देर से इलाज करवाते हैं। कई परिवार याददाश्त कमजोर होने को सामान्य बुढ़ापा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि शुरुआती जांच और सही जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।आने वाले समय में भारत में बुजुर्ग आबादी बढ़ने के साथ डिमेंशिया के मामलों में और वृद्धि होने की आशंका है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ जागरूकता, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली को सबसे बड़ा बचाव मान रहे हैं।

बच्चों पर इसका प्रभाव और कारण 

 भूलने की बीमारी और कमजोर याददाश्त का असर अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों में भी इसका प्रभाव तेजी से देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक मोबाइल फोन, टीवी, वीडियो गेम, सोशल मीडिया और डिजिटल स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों की एकाग्रता और याद रखने की क्षमता प्रभावित हो रही है। लगातार स्क्रीन देखने की आदत के कारण बच्चों का ध्यान जल्दी भटकने लगता है, जिससे पढ़ाई में फोकस कम हो जाता है।इसके अलावा तनाव, नींद की कमी, शारीरिक गतिविधियों में कमी और असंतुलित खानपान भी बच्चों की मानसिक क्षमता पर असर डाल रहे हैं। 

कई बच्चों में चीजें जल्दी भूलना, पढ़ा हुआ याद न रहना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और सीखने की गति धीमी होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो इसका असर बच्चों के आत्मविश्वास, पढ़ाई और व्यवहार पर भी पड़ सकता है। डॉक्टर बच्चों को पर्याप्त नींद, पौष्टिक आहार, नियमित खेलकूद, किताब पढ़ने की आदत और सीमित स्क्रीन टाइम देने की सलाह देते हैं। बादाम, अखरोट, दूध, हरी सब्जियां, फल और ओमेगा-3 युक्त भोजन बच्चों के दिमागी विकास के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। साथ ही परिवार के साथ बातचीत, मानसिक खेल और रचनात्मक गतिविधियां बच्चों की याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती हैं।

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