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अवैध रेत उत्खनन
अवैध रेत उत्खनन
बलरामपुर-रामानुजगंज

रेत की तस्करी : महानदी पर रेत माफिया का कब्जा प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा संकट 

बलरामपुर जिले के धंधापुर क्षेत्र में महानदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया जा रहा है। रेत माफिया रोजाना सैकड़ों वाहनों के जरिए रेत की तस्करी कर करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहे हैं। प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस की निष्क्रियता के कारण यह अवैध काम लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी योजनाओं के नाम पर रेत निकालकर खुले बाजार में बेची जा रही है। अवैध खनन से महान नदी पर बना करोड़ों रुपये का पुल भी खतरे में आ गया है और उसके पीलर कमजोर पड़ने लगे हैं। मामले में राजपुर एसडीएम ने कार्रवाई और संयुक्त टीम बनाकर रेत तस्करी रोकने का आश्वासन दिया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 09 May 2026, 11:06 AM · अपडेट: 09 Oct 2026, 12:40 AM
बलरामपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अवैध रेत खनन का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता के कारण रेत माफिया के हौसले बुलंद हैं। जिले के राजपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत धंधापुर से होकर बहने वाली महानदी इन दिनों अवैध खनन की मार झेल रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह होते ही माफिया सक्रिय हो जाते हैं और देर शाम तक नदी से लगातार रेत निकाली जाती है।

सुबह से शाम तक चलता है अवैध खनन

धंधापुर स्थित रेत घाट में हर दिन सैकड़ों ट्रैक्टर और भारी वाहन पहुंच रहे हैं। सुबह करीब पांच बजे से ही नदी के भीतर मशीनों और वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाती है। पूरे दिन रेत निकालने का काम जारी रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। यही वजह है कि रेत माफिया बेखौफ होकर अपना कारोबार चला रहे हैं।

रोजाना सैकड़ों वाहनों से हो रही रेत की तस्करी

जानकारी के अनुसार धंधापुर और आसपास के बरियों, आरा, धौरपुर तथा लूड्रा क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 200 वाहनों में रेत भरकर बाहर भेजी जा रही है। यह रेत अंबिकापुर सहित कई इलाकों तक पहुंचाई जाती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रतिदिन लाखों रुपये की रेत अवैध रूप से निकाली जा रही है। महीनेभर में यह कारोबार करोड़ों तक पहुंच जाता है। गर्मी के पूरे सीजन में करोड़ों रुपये के अवैध खनन की बात सामने आ रही है, लेकिन खनिज और राजस्व विभाग की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।

सरकारी योजनाओं की आड़ में चल रहा खेल

रेत तस्कर सरकारी निर्माण कार्यों और प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम का इस्तेमाल कर अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसी बहाने रेत निकालकर खुले बाजार में बेची जा रही है। अंबिकापुर-प्रतापपुर मुख्य मार्ग पर हर घंटे कई वाहन रेत लेकर गुजरते दिखाई देते हैं, लेकिन पुलिस और संबंधित विभाग कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ अधिकारियों और माफियाओं की मिलीभगत के कारण यह अवैध कारोबार लगातार बढ़ रहा है।

पुल की सुरक्षा पर मंडराया खतरा

महानदी पर लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से पांच वर्ष पहले पुल का निर्माण किया गया था। अब अवैध खनन के कारण पुल की नींव कमजोर पड़ने लगी है। बताया जा रहा है कि पुल के पीलर का हिस्सा जमीन से ऊपर दिखाई देने लगा है। भारी वाहनों के गुजरने पर पुल में कंपन महसूस किया जा रहा है। लोगों को आशंका है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पुल कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकता है। इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग का सेतु संभाग अब तक चुप्पी साधे हुए है।

प्रशासन ने कार्रवाई का दिया भरोसा

मामले को लेकर राजपुर एसडीएम देवेंद्र प्रधान ने कहा है कि राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अवैध रेत खनन पर रोक लगाने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नदी को बचाने के लिए प्रशासन गंभीर है और रेत माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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