खैरागढ़ जिले के ग्राम देवरी में इन दिनों चल रही श्रीमद्भागवत कथा का वातावरण पूर्ण रूप से भक्तिमय बना हुआ है। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।
कथा के दौरान आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री, जिन्हें लोग ‘चाय वाले बाबा’ के नाम से भी जानते हैं, ने भक्ति के वास्तविक अर्थ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान की प्राप्ति केवल भजन, सुर-ताल या संगीत से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सच्चे अनुराग, यानी गहरा प्रेम और पूर्ण समर्पण आवश्यक है।
बिना अनुराग के कोई भी भजन फलदायक नहीं
उन्होंने मीराबाई का उदाहरण देते हुए एक प्रेरक प्रसंग सुनाया। आचार्य ने बताया कि जब साधु-संतों ने मीराबाई से कहा कि वे केवल राग में भजन किया करें, तब मीरा ने ‘राग’ शब्द में ‘अनु’ जोड़कर उसे ‘अनुराग’ बना दिया और यह संदेश दिया कि भक्ति का आधार केवल संगीत नहीं, बल्कि प्रेम है। उनके अनुसार, बिना अनुराग के कोई भी भजन, कीर्तन या साधना पूर्ण फल नहीं दे सकती।
आचार्य ने आगे कहा कि आज के समय में भक्ति के नाम पर बड़े-बड़े पंडाल, माइक, भजन मंडलियां और सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ गया है, लेकिन कई बार इनमें सच्चे भाव और आंतरिक प्रेम की कमी दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि दिखावा और प्रतिस्पर्धा भक्ति की आत्मा को कमजोर करते हैं और अंततः मन को अशांति की ओर ले जाते हैं।
समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत
उन्होंने संत मीराबाई, सूरदास, कबीर, संत ज्ञानेश्वर, तुलसीदास, रैदास और रसखान जैसे महान संतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी की भक्ति का मूल आधार केवल और केवल अनुराग था। इसी कारण उन्हें ईश्वर की कृपा सहज रूप से प्राप्त हुई और उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आचार्य नरेन्द्र नयन शास्त्री ने लोगों से अपील की कि प्रत्येक कार्य को ईश्वर का कार्य मानकर किया जाए। ऐसा करने से मन में प्रेम, सेवा और त्याग की भावना विकसित होती है, जो धीरे-धीरे सच्चे अनुराग का रूप ले लेती है और व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है।
बड़ी संख्या में पहुचे श्रद्धालु
उन्होंने यह भी बताया कि वे अपने प्रवचनों से प्राप्त संपूर्ण चढ़ावा जरूरतमंद गरीब बेटियों के विवाह और सामाजिक सहायता कार्यों में समर्पित कर देते हैं, जिससे यह आयोजन केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक सेवा का माध्यम भी बन रहा है।
देवरी में चल रही इस श्रीमद्भागवत कथा में आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण बना हुआ है, जिससे यह आयोजन और भी अधिक महत्वपूर्ण बन गया है।