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इंडिया  हॉकी टीम  में यौन दुराचार का आरोप
इंडिया हॉकी टीम में यौन दुराचार का आरोप
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हॉकी  :  खिलाड़ियों के साथ अनुचित व्यवहार के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

भारतीय पुरुष सब-जूनियर हॉकी टीम के सपोर्ट स्टाफ सदस्य सुधीर गोल्ला को यौन दुराचार और अनुचित व्यवहार के आरोपों के बाद भोपाल में चल रहे राष्ट्रीय शिविर से हटा दिया गया है। रांची के एकलव्य हॉकी ट्रेनिंग सेंटर के खिलाड़ियों की शिकायत पर जांच शुरू हुई, जिसके बाद हॉकी इंडिया ने कार्रवाई की। पिछले छह महीनों में भारतीय हॉकी में यह चौथा बड़ा दुराचार विवाद है, जिससे खिलाड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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प्रकाशित: 17 May 2026, 06:51 PM · अपडेट: 01 Nov 2026, 12:32 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
 भारतीय हॉकी एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। भारतीय पुरुष सब-जूनियर हॉकी टीम के सपोर्ट स्टाफ सदस्य सुधीर गोल्ला को यौन दुराचार और अनुचित व्यवहार के आरोपों के बाद भोपाल में चल रहे राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारत की अंडर-18 टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर मुकाबले की तैयारी कर रही थी। मिली जानकारी के अनुसार, सुधीर गोल्ला के खिलाफ झारखंड के रांची स्थित मोराबादी के एकलव्य बॉयज एंड गर्ल्स हॉकी ट्रेनिंग सेंटर के कई प्रशिक्षुओं ने शिकायत दर्ज कराई थी। खिलाड़ियों ने उन पर अनुचित व्यवहार, कर्तव्यों में लापरवाही और खिलाड़ियों की सुरक्षा से समझौता करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। शिकायतों के बाद झारखंड के खेल एवं युवा मामले निदेशालय ने मामले की जांच शुरू की।

शिकायतों के बाद तत्काल कार्रवाई

प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए झारखंड सरकार ने इस सप्ताह सुधीर गोल्ला को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया। उनकी जगह प्रशिक्षण केंद्र में एक महिला कोच की नियुक्ति की गई है। इसके बाद हॉकी इंडिया ने भी कार्रवाई करते हुए उन्हें भोपाल में चल रहे राष्ट्रीय शिविर से हटा दिया गया । हॉकी इंडिया ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि खिलाड़ियों की शिकायतों और एकलव्य हॉकी सेंटर से हटाए जाने की जानकारी मिलने के बाद सुधीर गोल्ला को सब-जूनियर पुरुष टीम के शिविर से तत्काल प्रभाव से अलग कर दिया गया है।

“खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता”

महासंघ ने अपने बयान में कहा कि एथलीटों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। हॉकी इंडिया ने कहा कि सभी खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित और संरक्षित माहौल सुनिश्चित करना संगठन की प्रतिबद्धता है। हालांकि, इस घटना के बाद हॉकी इंडिया के भीतर ही सुरक्षा व्यवस्था और शिकायतों के निपटारे को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेडरेशन के अंदरूनी सूत्रों ने माना है कि पिछले कुछ मामलों में उचित जांच नहीं की गई और इससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा है।

छह महीनों में चौथा बड़ा विवाद

भारतीय हॉकी में सुरक्षा और दुराचार से जुड़े मामलों की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले छह महीनों में यह चौथा बड़ा मामला है जिसने हॉकी प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
  •  नवंबर 2025 में जूनियर महिला हॉकी टीम के एक कोच का अनुबंध यौन दुराचार के आरोपों के बाद नवीनीकृत नहीं किया गया था।
  •  इसके बाद वरिष्ठ महिला हॉकी टीम के कोच हरेंद्र सिंह ने भी खिलाड़ियों द्वारा लगाए गए दुराचार के आरोपों के बाद इस्तीफा दे दिया था।
  •  अप्रैल 2026 में हॉकी इंडिया के एक अन्य अधिकारी पर महिला अधिकारियों और कोचों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
  •  अब सुधीर गोल्ला पर लगे आरोपों ने भारतीय हॉकी की कार्यप्रणाली और खिलाड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

फेडरेशन पर उठे गंभीर सवाल

सूत्रों के मुताबिक, हॉकी इंडिया के भीतर कुछ लोग आरोपित व्यक्तियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके कारण मामलों की निष्पक्ष जांच प्रभावित होती है। सूत्रों ने स्वीकार किया कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में संगठन अपेक्षित स्तर पर काम नहीं कर पाया है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने भारतीय हॉकी में खिलाड़ियों की सुरक्षा, महिला खिलाड़ियों के संरक्षण और शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हॉकी इंडिया इस मामले में पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।

भारतीय खेल जगत अब सुरक्षित नहीं है 

हाल के वर्षों में भारतीय खेल जगत में खिलाड़ियों की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक सुरक्षा का मुद्दा लगातार गंभीर बहस का विषय बना हुआ है। पहलवान विनेश फोगट   समेत देश की कई महिला खिलाड़ियों ने खेल संगठनों और अधिकारियों पर उत्पीड़न एवं असुरक्षा के आरोप लगाकर खुलकर आवाज उठाई थी। विनेश फोगाट और अन्य पहलवानों के आंदोलन ने पूरे देश में खेल संस्थाओं की जवाबदेही, खिलाड़ियों के अधिकार और सुरक्षित माहौल की आवश्यकता को लेकर बड़ी चर्चा छेड़ दी थी। अब भारतीय हॉकी में लगातार सामने आ रहे यौन दुराचार और अनुचित व्यवहार के मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि खिलाड़ियों, विशेषकर युवा खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खेल महासंघ कितने गंभीर हैं। लगातार बढ़ते विवादों से खेल संस्थाओं की कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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