CG Sports: ग्रामीण इलाकों की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित सरगुजा ओलंपिक में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिला स्तरीय प्रतियोगिता के समापन के बाद सीतापुर ब्लॉक के 50 से अधिक बच्चे देर रात तक अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में भूखे-प्यासे अपने घर लौटने का इंतजार करते रहे। बच्चों को घर पहुंचाने के लिए समय पर बस की व्यवस्था नहीं की गई थी।
वीडियो कॉल कर विधायक रामकुमार टोप्पो से मांगी मदद
स्टेडियम में परेशान बच्चों ने स्थानीय लोगों की मदद से सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को वीडियो कॉल किया। बच्चों ने उन्हें बताया कि वे काफी देर से भूखे-प्यासे बैठे हैं और घर जाने के लिए कोई बस नहीं पहुंची है। देर रात होने के कारण वे काफी परेशान थे। बच्चों की स्थिति जानने के बाद विधायक ने तत्काल जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क किया और व्यवस्था करने को कहा।
छात्रावास में आधी रात को तैयार कराया गया भोजन
बच्चों की परेशानी को देखते हुए प्रशासन ने सबसे पहले उनके भोजन की व्यवस्था की। सभी बच्चों को नवापारा स्थित आदिवासी विकास विभाग के छात्रावास ले जाया गया। यहां रात में भोजन तैयार कराया गया और बच्चों को खाना खिलाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में रात के करीब 12 बज गए। इसके बाद जिला पंचायत सीईओ की पहल पर बच्चों को घर पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई। इसी बीच सीतापुर जनपद पंचायत की ओर से भेजी जाने वाली बस भी देरी से पहुंची।दो बसों से सीतापुर रवाना किए गए खिलाड़ी
आखिरकार दो बसों के जरिए सभी बच्चों को सीतापुर के लिए रवाना किया गया। अधिकारियों ने बस चालकों और संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए कि किसी भी बच्चे को रास्ते में नहीं छोड़ा जाए और प्रत्येक खिलाड़ी को उसके घर तक सुरक्षित पहुंचाया जाए। इस तरह आधी रात के बाद बच्चों की घर वापसी हो सकी।
तीन लाख रुपये का बजट, फिर भी क्यों हुई लापरवाही
इस पूरे मामले ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जनपद पंचायत सीतापुर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब प्रतियोगिता के आयोजन और खिलाड़ियों के आवागमन के लिए प्रत्येक जनपद पंचायत को तीन लाख रुपये का बजट दिया गया था, तो बच्चों को घर पहुंचाने के लिए समय पर बस क्यों नहीं मिली।












